थी मिरे दिल की उमंगों ही से दुनिया की बहार
दिल परेशाँ क्या हुआ आलम परेशाँ हो गया
लहू के रंग-ओ-गुल से मैं ने इक बस्ती बनाई है
बदलती है हर इक लम्हा मगर तस्वीर 'आलम की
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
थी मिरे दिल की उमंगों ही से दुनिया की बहार
दिल परेशाँ क्या हुआ आलम परेशाँ हो गया
लहू के रंग-ओ-गुल से मैं ने इक बस्ती बनाई है
बदलती है हर इक लम्हा मगर तस्वीर 'आलम की