रो दिए फ़रियाद पर मेरी बुतान-ए-संग-दिल
मेरे नालों से पिघल कर मोम पत्थर हो गए
डूबने वाले को आवाज़ कोई दे कि न दे
डूबने वाला तो आवाज़ दिए जाता है
दर्द की सलीबों पर लाश हो चुके नाले
बे-ज़मीर हाकिम को 'अद्ल की गवाही क्या
परचम-ए-दर्द उठाओ कोई फ़रियाद करो
इतना चीख़ो कि पहाड़ों का जिगर कट जाए