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स्वास्थ्य पर कहानियाँ

ऊपर नीचे और दरमियान

सआदत हसन मंटो

अभिजात्य वर्ग के छल कपट और उनके शील-संकोच पर आधारित एक ऐसी कहानी है जिसमें बड़ी उम्र के पति-पत्नी के शयनकक्ष के मामलों को दिलचस्प अंदाज़ में बयान किया गया है।

क्वारंटीन

राजिंदर सिंह बेदी

कहानी में एक ऐसी वबा के बारे में बताया गया है जिसकी चपेट में पूरा इलाक़ा है और लोगों की मौत निरंतर हो रही है। ऐसे में इलाके़ के डॉक्टर और उनके सहयोगी की सेवाएं प्रशंसनीय हैं। बीमारों का इलाज करते हुए उन्हें एहसास होता है कि लोग बीमारी से कम और क्वारंटीन से ज़्यादा मर रहे हैं। बीमारी से बचने के लिए डॉक्टर खु़द को मरीज़ों से अलग कर रहे हैं जबकि उनका सहयोगी भागू भंगी बिना किसी डर और ख़ौफ़ के दिन-रात बीमारों की सेवा में लगा हुआ है। इलाक़े से जब महामारी ख़त्म हो जाती है तो इलाक़े के गणमान्य की तरफ़ से डॉक्टर के सम्मान में जलसे का आयोजन किया जाता है और डॉक्टर के काम की तारीफ़ की जाती है लेकिन भागू भंगी का ज़िक्र तक नहीं होता।

अन्न-दाता

कृष्ण चंदर

बंगाल में जब अकाल पड़ा तो शुरू में हुक्मरानों ने इसे क़हत मानने से ही इंकार कर दिया। वे हर रोज़ शानदार दावतें उड़ाते और उनके घरों के सामने भूख से बेहाल लोग दम तोड़ते रहते। वह भी उन्हीं हुक्मरानों में से एक था। शुरू में उसने भी दूसरों की तरह समस्या से नज़र चुरानी चाही। मगर फिर वह उनके लिए कुछ करने के लिए उतावला हो गया। कई योजनाएँ बनाई और उन्हें अमल में लाने के लिए संघर्ष करने लगा।

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फातो

सआदत हसन मंटो

"इस कहानी में प्रेम के प्रभाव को बयान किया गया है। मियां साहब को बुख़ार की हालत में अपनी मुलाज़िमा फातो से मुहब्बत हो जाती है। फातो अपने मुहल्ले में काफ़ी बदनाम है लेकिन इसके बावजूद मियां साहब ख़ुद पर क़ाबू नहीं रख पाते और एक महीने बाद उसे घर से लेकर फ़रार हो जाते हैं।"

ख़ुदकुशी

सआदत हसन मंटो

यह कहानी एक ऐसे शख़्स की है जिसके यहाँ शादी के बाद बेटी का जन्म होता है। पर लाख कोशिश करने के बाद भी वह उसका कोई अच्छा सा नाम नहीं सोच पाता है। नाम की तलाश में वह डिक्शनरी ख़रीदता है, पर जब तक डिक्शनरी लेकर वह घर पहुँचता है तब तक बेटी मर चुकी होती है। बेटी के ग़म में कुछ ही दिनों बाद उसकी बीवी भी मर जाती है। ज़िंदगी के दिए इन सदमों से तंग आकर वह ख़ुदकुशी करने की सोचता है। वह रेलवे लाइन पर जाता है मगर वहाँ पहले से ही एक दूसरा शख़्स लाइन पर लेटा होता है। सामने से आ रही ट्रेन को देखकर वह उस शख़्स को बचा लेता है और उसे ऐसी बातें कहता है कि उन बातों से उसकी ख़ुद की ज़िंदगी पूरी तरह बदल जाती है।

ख़ोरेश्ट

सआदत हसन मंटो

यह कहानी समाज के एक नाज़ुक पहलू को सामने लाता है। सरदार ज़ोरावर सिंह, सावक कापड़िया का लंगोटिया यार है। अपना अक्सर वक़्त उसके घर पर गुज़ारता है। दोस्त होने की वजह से उसकी बीवी ख़ुर्शीद से भी बे-तकल्लुफ़ी है। सरदार हर वक़्त ख़ुरशीद की आवाज़ की तारीफ़ करता है और उसके लिए मुनासिब स्टूडियो की तलाश में रहता है। अपने उन उपायों से वो ख़ुर्शीद को राम कर के उससे शादी कर लेता है।

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कोख जली

राजिंदर सिंह बेदी

यह एक ऐसी माँ की कहानी है जो फोड़े के ज़ख्मों ज़ख़्मों से परेशान बेटे से बे-पनाह मोहब्बत करती है। हालांकि बेटे के नासूर बन चुके ज़ख़्मों की वजह से सारी बस्ती उन से नफ़रत करती है। शुरू के दिनों में उसका बेटा शराब के नशे में उससे कहता है कि बहुत से लोग नशे में अपनी माँ को बीवी समझने लगते हैं मगर वह हमेशा ही उसकी माँ ही रही। हालांकि शराब पीकर आने के बाद वह बेटे के साथ भी वैसा ही बर्ताव करती है जैसा कि शौहर के पीकर आने के बाद उसके साथ किया करती थी।

फाहा

सआदत हसन मंटो

इसमें जवानी के आरम्भ में होने वाली शारीरिक परिवर्तनों से बे-ख़बर एक लड़की की कहानी बयान की गई है। आम खाने से गोपाल के फोड़ा निकल आता है तो वो अपने माँ-बाप से छुप कर अपनी बहन निर्मला की मदद से फोड़े पर फाहा रखता है। निर्मला इस पूरी प्रक्रिया को बहुत ध्यान और दिलचस्पी से देखती है और गोपाल के जाने के बाद अपने सीने पर फाहा रखती है।

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शलजम

सआदत हसन मंटो

इस कहानी में रात को देर से घर आने वाले शौहरों की बीवी के साथ होने वाली बहस को दिखाया गया है। वह रात में तीन बजे आया था। जब उसने खाना माँगा तो बीवी ने देने से इंकार कर दिया। इस पर उन दोनों के बीच बहस होने लगी। दोनों अपनी-अपनी दलीलें देने लगे। कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। बहस हो ही रही थी कि अंदर से नौकर आया और कहने लगा कि खाना तैयार है। खाने के बारे में सुनते ही मियाँ-बीवी के बीच सुलह हो गई।