दिल

दाग़ तो दो ही चीज़ों पर सजता है, दिल और जवानी।

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

दिल ऐसी शैय नहीं जो बाँटी जा सके।

सआदत हसन मंटो

दाग़ तो दो ही चीज़ों पर सजता है, दिल और जवानी।

मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी

सुलगते सिगरेट और धड़कते दिल में कितनी मुमासिलत है!

बलराज मेनरा