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श्री कृष्ण शायरी पर शेर

'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी

सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज

हसरत मोहानी

पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था

हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का

हसरत मोहानी

वो रातों-रात 'सिरी-कृष्ण' को उठाए हुए

बला की क़ैद से 'बसदेव' का निकल जाना

फ़िराक़ गोरखपुरी

दीवार-ओ-दर पे कृष्ण की लीला के नक़्श हैं

मंदिर है ये तो 'कृष्ण' के दरबार की तरह

शोभा कुक्कल
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