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Deepak Budki's Photo'

प्रसिद्ध कहानीकार, समकालीन सामाजिक मुद्दों और मानवीय मनोविज्ञान पर आधारित कहानियों के लिए विख्यात

प्रसिद्ध कहानीकार, समकालीन सामाजिक मुद्दों और मानवीय मनोविज्ञान पर आधारित कहानियों के लिए विख्यात

दीपक बुदकी का परिचय

उपनाम : 'दीपक बुदकी'

मूल नाम : दीपक कुमार बुदकी

जन्म : 15 Feb 1950 | श्रीनगर, जम्मू कश्मीर

LCCN :no00092652

पहचान: प्रख्यात कथाकार (अफसाना निगार), उपन्यासकार और आलोचक

दीपक कुमार बुदकी 15 फरवरी 1950 को श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर) में पैदा हुए। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा अपने घर के पास स्थित 'जबरी स्कूल' (गाडनी आट मन्ज़) से प्राप्त की।

पांचवीं के बाद गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल नवाकदल और फिर डी.ए.वी. हायर सेकेंडरी स्कूल अमीर कदल से ग्यारहवीं पास की। बारहवीं श्री प्रताप कॉलेज से की और वहीं से ऑनर्स इन बॉटनी (B.Sc. Hon's) की डिग्री ली। इसके बाद कश्मीर यूनिवर्सिटी से 1968-70 के दौरान एम.एस.सी. (बॉटनी) और 1971 में गांधी मेमोरियल कॉलेज से बी.एड. मुकम्मल किया। उन्होंने महज़ 21 साल की उम्र में एम.एस.सी., बी.एड. और 'अदीब-ए-माहिर' की परीक्षाएं पास करके नौकरी का आगाज़ कर दिया था।

साहित्यिक दुनिया (अदबी दुनिया) में वह दीपक बुदकी के नाम से प्रसिद्ध हैं और उनकी गिनती भारत व पाकिस्तान के प्रख्यात कहानीकारों में होती है। उनकी कहानियों का कैनवास बहुत व्यापक है, जिसमें उन्होंने कश्मीर के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों के राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों, गरीब अवाम के शोषण और महिलाओं के मनोविज्ञान को अत्यंत सलीके और गहरे अवलोकन (मुशाहिदे) के साथ प्रस्तुत किया है।

वह हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में पिछले चालीस वर्षों से लिख रहे हैं। उनकी भाषा सरल, नैरेटिव (बयानियां) सुगठित और लेखन शैली में एक विशेष प्रवाह व आकर्षण पाया जाता है, जो पाठक को मंत्रमुग्ध करके वास्तविकता के करीब ले जाता है।

कथा लेखन (अफ़साना निगारी) के साथ-साथ वह आलोचनात्मक और शोधपरक दूरदर्शिता के भी स्वामी हैं। उन्होंने समकालीन लेखकों और उर्दू फिक्शन की वर्तमान स्थिति पर अत्यंत मूल्यवान आलोचनात्मक लेख लिखे हैं।

उनके प्रमुख कहानी संग्रहों (अफ़सानवी मजमुओं) में "अधूरे चेहरे", "चिनार के नीचे", "जेब्रा क्रॉसिंग पर खड़ा आदमी", "रेज़ा रेज़ा हयात", "रूढ़ का कर्ब" (आत्मा की पीड़ा) और "मुट्ठी भर रेत" शामिल हैं। आलोचना के क्षेत्र में उनकी दो पुस्तकें "अस्री तहरीरें" और "अस्री शऊर" प्रकाशित होकर खूब सराहना प्राप्त कर चुकी हैं।

इसके अलावा उन्होंने "अपना अपना सच" और "आज़ादी" के नाम से उपन्यास भी लिखे, जबकि उनकी आत्मकथा (खुद नविश्त सवाने हयात) "लोहे हयात" के नाम से प्रकाशित हुई।

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