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Hayatullah Ansari's Photo'

हयातुल्लाह अंसारी

1911 - 1999 | लखनऊ, भारत

प्रख्यात प्रगतिशील फ़िक्शन लेखक और पत्रकार - ग़ज़ल विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

प्रख्यात प्रगतिशील फ़िक्शन लेखक और पत्रकार - ग़ज़ल विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

हयातुल्लाह अंसारी का परिचय

उपनाम : 'हयातुल्लाह अंसारी'

मूल नाम : मोहम्मद हयातुल्लाह

जन्म : 11 May 1911 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश

निधन : 18 Feb 1999

LCCN :n85019760

पुरस्कार : साहित्य अकादमी अवार्ड(1970)

पहचान: प्रसिद्ध फ़िक्शन लेखक, पत्रकार, राजनीतिज्ञ और प्रगतिशील साहित्यकार

हयातउल्लाह अंसारी 11 मई 1911 (परिवार के अनुसार जन्म तिथि 1 मई 1901 है) को फ़रंगी महल, लखनऊ में पैदा हुए। उनके वालिद (पिता) मौलवी वहीदउल्लाह अंसारी थे। उनकी शुरुआती शिक्षा फ़रंगी महल के शैक्षणिक माहौल में हुई और उन्होंने 'उलूम-ए-शर्क़िया' (प्राच्य विद्या) की सनद (डिग्री) हासिल की। बाद में उन्होंने मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़ से बी.ए. किया। छात्र जीवन के दौरान वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन से प्रभावित हुए, जबकि बाद में उन्होंने गांधीवादी विचारधारा का भी गहरा प्रभाव स्वीकार किया।

हयातउल्लाह अंसारी उर्दू के प्रख्यात कहानीकारों और उपन्यासकारों में गिने जाते हैं। उनके कहानी संग्रहों "अनोखी मुसीबत", "भरे बाज़ार में" और "शिकस्ता कंगूरे" को विशेष प्रसिद्धि मिली। उनकी कहानी "आख़िरी कोशिश" उर्दू अफ़साने की महत्वपूर्ण रचनाओं में शुमार की जाती है। उनकी कहानियों में सामाजिक यथार्थवाद (हक़ीक़त निगारी), मानवीय दुख-दर्द, वर्गीय समस्याओं और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है। डॉ. इशरत नाहिद ने उनकी कहानियों का समग्र संग्रह "हयातुल्लाह अंसारी की कहानी कायनात" शीर्षक से प्रकाशित किया।

 

कहानी लेखन के अलावा उन्होंने पांच भागों (जिल्दों) में फैला एक विशाल और ऐतिहासिक उपन्यास "लहू के फूल" (1969) लिखा, जिसकी पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) बीसवीं सदी के शुरुआती आधे भाग का भारत, आज़ादी की लड़ाई, ख़िलाफ़त आंदोलन और किसानों व मज़दूरों का जीवन है। इस महान रचना के लिए उन्हें 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, "मदार" और "घरोंदा" उनके प्रसिद्ध नावलेट (लघु उपन्यास) हैं। उन्होंने आधुनिकता के विषय पर 'जदीदियत की सैर' (आधुनिकता की सैर) नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक भी लिखी।

पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनकी सेवाएँ उल्लेखनीय हैं। वे लंबे समय तक दैनिक अख़बार "क़ौमी आवाज़" के संपादक रहे और उर्दू पत्रकारिता को नए आयाम दिए। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे और भारत सरकार के 'तरक़्क़ी-ए-उर्दू ब्यूरो' के डिप्टी चेयरमैन के पद पर भी काम किया। मोरक्को (मराक़िश) यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद (एग्ज़ॉरी) डॉक्टरेट की डिग्री से भी नवाज़ा था।

हयातउल्लाह अंसारी का शुमार उन लेखकों में होता है जिन्होंने प्रगतिशील विचारधारा, गांधीवादी मानवतावाद और सामाजिक चेतना को अपने साहित्य का हिस्सा बनाया। उर्दू फ़िक्शन और पत्रकारिता में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

निधन: हयातउल्लाह अंसारी का इंतकाल 18 फरवरी 1999 को लखनऊ में हुआ।

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