लुत्फ़ुन्निसा इम्तियाज़
ग़ज़ल 8
नज़्म 1
अशआर 3
ऑडियो 5
एक हों नालाँ क़फ़स में हाए ऐ बुलबुल ख़मोश
दश्त-ए-वहशत में हमारा अब हुआ है बूद-ओ-बाश
है दिल-ए-उश्शाक़ तेरे जाम-ओ-मीना बिन ख़राब
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