मौलवी अब्दुल हक़ के लेख
मख़लूत ज़बान
(यह लेख अंजुमन रूह-ए-अदब इलाहाबाद की 21 दिसंबर 1941 को आयोजित सभा में पढ़ा गया) जनाब सदर और हज़रात! उर्दू पर एक आपत्ति यह भी की जाती है कि यह मिश्रित भाषा है। यहाँ की शुद्ध भाषा नहीं। दोग़ली है। इस बात से तो किसी को इंकार नहीं हो सकता कि यह ठेठ