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मोहसिन नक़वी

1947 - 1996 | मुल्तान, पाकिस्तान

लोकप्रिय पाकिस्तानी शायर, कम उम्र में देहांत।

लोकप्रिय पाकिस्तानी शायर, कम उम्र में देहांत।

मोहसिन नक़वी

ग़ज़ल 49

नज़्म 23

अशआर 41

हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद कर दे

तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर

कौन सी बात है तुम में ऐसी

इतने अच्छे क्यूँ लगते हो

सिर्फ़ हाथों को देखो कभी आँखें भी पढ़ो

कुछ सवाली बड़े ख़ुद्दार हुआ करते हैं

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यूँ देखते रहना उसे अच्छा नहीं 'मोहसिन'

वो काँच का पैकर है तो पत्थर तिरी आँखें

कल थके-हारे परिंदों ने नसीहत की मुझे

शाम ढल जाए तो 'मोहसिन' तुम भी घर जाया करो

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पुस्तकें 8

 

चित्र शायरी 5

 

वीडियो 36

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ऑडियो 12

अगरचे मैं इक चटान सा आदमी रहा हूँ

अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था

कठिन तन्हाइयों से कौन खेला मैं अकेला

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