नैयर मसूद के लेख
उर्दू शेअरियात की इस्तिलाहें: मानी-आफ़रीनी, नाज़ुक-ख़्याली, ख़याल-बंदी
प्रोफ़ेसर आल अहमद सुरूर साहब की फ़रमाइश पर मैंने एक लेख में उर्दू शेरियात (काव्यशास्त्र) की बारह इस्तलाहों (पारिभाषिक शब्दों) पर चर्चा की थी। लेख पूरा करने के बाद एहसास हुआ कि इसमें मानी-आफ़रीनी, नाज़ुक-ख़याली और ख़याल-बंदी की व्याख्या संतोषजनक नहीं