नामी अंसारी
ग़ज़ल 16
अशआर 2
घर छोड़ा बे-सम्त हुए हैरानी में
कैसे कैसे दुख झेले नादानी में
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ऐ आबला-पा और भी रफ़्तार ज़रा तेज़
ख़ुद आज़मा के भी दा'वे अजल के देखते हैं
घर छोड़ा बे-सम्त हुए हैरानी में
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