नूह नारवी
ग़ज़ल 82
अशआर 93
मिलना जो न हो तुम को तो कह दो न मिलेंगे
ये क्या कभी परसों है कभी कल है कभी आज
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere