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क्या आप जानते हैं?

इस्मत

'नए साहित्य के निर्माता' श्रंखला के अधीन मंटो ने इस्मत चुग़ताई पर एक विनिबंध लिखा था जो 1948 में बंबई के एक प्रकाशक ने प्रकाशित किया था। उसके पहले ही पृष्ठ पर हैदराबाद से मंटो के नाम आए हुए एक पत्र का उल्लेख है। पत्र में एक साहब ने लिखा था:
"ये क्या बात हुई कि इस्मत चुग़ताई ने आप से शादी नहीं की? मंटो और इस्मत अगर ये दो हस्तियां मिल जातीं तो कितना अच्छा होता। मगर अफ़सोस कि इस्मत ने शाहिद से शादी कर ली और मंटो..."
उन्हीं दिनों हैदराबाद में प्रगतिशील लेखकों का सम्मेलन हुआ था जिसमें मंटो सम्मिलित नहीं हुए थे। हैदराबाद की एक पत्रिका में उस सम्मेलन की रिपोर्ट छपी थी जिसमें लिखा था कि वहां कई लड़कियों ने इस्मत को घेर कर यह सवाल किया था कि आप ने मंटो से शादी क्यों नहीं की?
मंटो ने इस बारे में लिखा है कि यह बात असाधारण रूप से दिलचस्प है कि सारे हिन्दुस्तान में हैदराबाद ही एक ऐसी जगह है जहां मर्द-औरतें मेरी और इस्मत की शादी के बारे में चिंतित रहे।
इस्मत मंटो को मंटो भाई कहती थीं। बंबई में कई साल उन दोनों का साथ रहा। दोनों में गहरी दोस्ती भी थी और वाद-विवाद भी होता था।