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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

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आज की प्रस्तुति

1960 और 1970 के दशकों में मुशायरों के लोकप्रिय शायर

वादा-ए-शाम-ए-फ़र्दा पे दिल मुझे गर यक़ीं ही आए तो मैं क्या करूँ

उन की झूटी तसल्ली के तूफ़ान में नब्ज़-ए-दिल डूब जाए तो मैं क्या करूँ

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