ग़ज़ल 5

 

शेर 5

लोग नफ़रत की फ़ज़ाओं में भी जी लेते हैं

हम मोहब्बत की हवा से भी डरा करते हैं

क़िस्मत अजीब खेल दिखाती चली गई

जो हँस रहे थे उन को रुलाती चली गई

जिसे पढ़ा नहीं तुम ने कभी मोहब्बत से

किताब-ए-ज़ीस्त का वो बाब हैं मिरे आँसू

मैं तो मुश्ताक़ हूँ आँधी में भी उड़ने के लिए

मैं ने ये शौक़ अजब दिल को लगा रक्खा है

तीरगी ख़ामुशी बेबसी तिश्नगी

हिज्र की रात में ख़ामियाँ ख़ामियाँ

पुस्तकें 1

Lata Se Haya Tak

 

2013

 

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