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ज़ेब ग़ौरी

1928 - 1985 | कानपुर, भारत

भारत में अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

भारत में अग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल

अक्स-ए-फ़लक पर आईना है रौशन आब ज़ख़ीरों का

नोमान शौक़

अक्स-ए-फ़लक पर आईना है रौशन आब ज़ख़ीरों का

नोमान शौक़

कब तलक ये शाला-ए-बे-रंग मंज़र देखिए

नोमान शौक़

कब तलक ये शाला-ए-बे-रंग मंज़र देखिए

नोमान शौक़

कोई भी दर न मिला नारसी के मरक़द में

नोमान शौक़

कोई भी दर न मिला नारसी के मरक़द में

नोमान शौक़

ख़ंजर चमका रात का सीना चाक हुआ

नोमान शौक़

ख़ंजर चमका रात का सीना चाक हुआ

नोमान शौक़

खुली थी आँख समुंदर की मौज-ए-ख़्वाब था वो

नोमान शौक़

खुली थी आँख समुंदर की मौज-ए-ख़्वाब था वो

नोमान शौक़

ख़ाक आईना दिखाती है कि पहचान में आ

नोमान शौक़

ख़ाक आईना दिखाती है कि पहचान में आ

नोमान शौक़

गर्म लहू का सोना भी है सरसों की उजयाली में

नोमान शौक़

गर्म लहू का सोना भी है सरसों की उजयाली में

नोमान शौक़

गहरी रात है और तूफ़ान का शोर बहुत

ज़ेब ग़ौरी

गहरी रात है और तूफ़ान का शोर बहुत

ज़ेब ग़ौरी

ठहरा वही नायाब कि दामन में नहीं था

नोमान शौक़

ठहरा वही नायाब कि दामन में नहीं था

नोमान शौक़

ढला न संग के पैकर में यार किस का था

नोमान शौक़

ढला न संग के पैकर में यार किस का था

नोमान शौक़

बुझ कर भी शो'ला दाम-ए-हवा में असीर है

नोमान शौक़

बुझ कर भी शो'ला दाम-ए-हवा में असीर है

नोमान शौक़

बस एक पर्दा-ए-इग़माज़ था कफ़न उस का

नोमान शौक़

बस एक पर्दा-ए-इग़माज़ था कफ़न उस का

नोमान शौक़

बे-हिसी पर मिरी वो ख़ुश था कि पत्थर ही तो है

नोमान शौक़

बे-हिसी पर मिरी वो ख़ुश था कि पत्थर ही तो है

नोमान शौक़

भड़कती आग है शो'लों में हाथ डाले कौन

नोमान शौक़

भड़कती आग है शो'लों में हाथ डाले कौन

नोमान शौक़

मैं अक्स-ए-आरज़ू था हवा ले गई मुझे

नोमान शौक़

मैं अक्स-ए-आरज़ू था हवा ले गई मुझे

नोमान शौक़

मैं तिश्ना था मुझे सर-चश्मा-ए-सराब दिया

नोमान शौक़

मैं तिश्ना था मुझे सर-चश्मा-ए-सराब दिया

नोमान शौक़

मैं तिश्ना था मुझे सर-चश्मा-ए-सराब दिया

नोमान शौक़

मुराद-ए-शिकवा नहीं लुत्फ़-ए-गुफ़्तुगू के सिवा

नोमान शौक़

मुराद-ए-शिकवा नहीं लुत्फ़-ए-गुफ़्तुगू के सिवा

नोमान शौक़

लगाऊँ हाथ तुझे ये ख़याल-ए-ख़ाम है क्या

नोमान शौक़

लगाऊँ हाथ तुझे ये ख़याल-ए-ख़ाम है क्या

नोमान शौक़

शोला-ए-मौज-ए-तलब ख़ून-ए-जिगर से निकला

नोमान शौक़

शोला-ए-मौज-ए-तलब ख़ून-ए-जिगर से निकला

नोमान शौक़

सूरज ने इक नज़र मिरे ज़ख़्मों पे डाल के

नोमान शौक़

सूरज ने इक नज़र मिरे ज़ख़्मों पे डाल के

नोमान शौक़

है बहुत ताक़ वो बेदाद में डर है ये भी

नोमान शौक़

है बहुत ताक़ वो बेदाद में डर है ये भी

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI