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Abdul Qavi Desnavi's Photo'

अब्दुल क़वी दस्नवी

1930 - 2011 | भोपाल, भारत

प्रसिद्ध उर्दू लेखक, शिक्षक, आलोचक, शोधकर्ता

प्रसिद्ध उर्दू लेखक, शिक्षक, आलोचक, शोधकर्ता

अब्दुल क़वी दस्नवी का परिचय

मूल नाम : सय्यद अब्दुल क़वी

जन्म : 01 Nov 1930 | नालंदा, बिहार

निधन : 07 Jul 2011 | भोपाल, मध्य प्रदेश

पहचान: प्रसिद्ध उर्दू लेखक, शिक्षक, आलोचक, शोधकर्ता

प्रोफेसर अब्दुल कवी दसनवी का जन्म 1 नवंबर 1930 को बिहार के नालंदा जिले के प्रसिद्ध गाँव 'देसना' के एक सम्मानित शिक्षित परिवार में हुआ था। वह प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक अल्लामा सैयद सुलेमान नदवी के परिवार से थे। उनके पिता सैयद मोहम्मद सईद रज़ा सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई में उर्दू, अरबी और फारसी के प्रोफेसर थे। दसनवी साहब ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार में प्राप्त की और उच्च शिक्षा (बी.ए. और एम.ए.) सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से पूरी की। उनका पूरा शैक्षणिक जीवन उर्दू साहित्य के प्रचार और शोध के लिए समर्पित रहा। वह फरवरी 1961 में सैफिया पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, भोपाल के उर्दू विभाग से जुड़े और लंबे समय तक इसके अध्यक्ष रहे। उनके मार्गदर्शन में दर्जनों छात्रों ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और आज उर्दू जगत के कई प्रसिद्ध कवि और लेखक उनके शिष्यों में शामिल हैं।

उर्दू साहित्य में अब्दुल कवी दसनवी की पहचान एक प्रामाणिक शोधकर्ता और ग्रंथ सूचीकार (Bibliographer) के रूप में है। उन्होंने उर्दू साहित्य के तीन स्तंभों यानी मिर्ज़ा ग़ालिब, अल्लामा इक़बाल और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पर असाधारण शोध कार्य किया। उनकी 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिनमें 'भोपाल और ग़ालिब', 'तलाश-ए-आज़ाद', 'हयात-ए-अबुल कलाम आज़ाद', 'मुताला-ए-खुतूत-ए-ग़ालिब' और 'इकबालियात की तलाश' जैसी पुस्तकें उर्दू साहित्य की बहुमूल्य संपत्ति हैं। उन्होंने ग़ालिब के 'नुस्खा-ए-भोपाल' पर भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके शैक्षणिक कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंदिरा गांधी, डॉ. शंकर दयाल शर्मा, डॉ. जाकिर हुसैन, मौलवी अब्दुल हक, कृष्ण चंदर और कैफी आज़मी जैसी दिग्गज हस्तियां उनके साथ पत्र-व्यवहार करती थीं।

दसनवी ने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी कार्य किया, जिनमें मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के सचिव, कला संकाय के डीन (बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल) और अंजुमन तरक्की उर्दू (हिंद) की आम सभा के सदस्य शामिल थे। उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में, 1 नवंबर 2017 को गूगल ने उनकी 87वीं जयंती पर एक विशेष 'गूगल डूडल' (Google Doodle) जारी कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने भोपाल को अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र बनाया और वहीं से उर्दू शोध के नए द्वार खोले।

निधन: 7 जुलाई 2011 को भोपाल में हुआ और वहीं सुपुर्द-ए-खाक हुए।

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