- पुस्तक सूची 178836
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1989
नाटक / ड्रामा919 एजुकेशन / शिक्षण344 लेख एवं परिचय1380 कि़स्सा / दास्तान1584 स्वास्थ्य105 इतिहास3279हास्य-व्यंग607 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1705 पत्र738
जीवन शैली30 औषधि981 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4299 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4755 शोध एवं समीक्षा6596अफ़साना2681 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2038पाठ्य पुस्तक451 अनुवाद4248महिलाओं की रचनाएँ5831-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1278
- दोहा48
- महा-काव्य100
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1257
- हाइकु11
- हम्द52
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1597
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात581
- माहिया20
- काव्य संग्रह4852
- मर्सिया386
- मसनवी746
- मुसद्दस42
- नात580
- नज़्म1193
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
आबिद सुहैल का परिचय
मूल नाम : सय्यद मोहम्मद आबिद
जन्म : 17 Nov 1932 | उरई, उत्तर प्रदेश
निधन : लखनऊ, उत्तर प्रदेश
LCCN :no99013643
आबिद सुहैल मुमताज़ अफ़्साना निगार और एक बाकमाल पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी सारी ज़िंदगी अदब और पत्रकारिता के द्वारा समाज की नकारात्मक शक्तियों से मुक़ाबला करते गुज़री। वो कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्यों में शामिल रहे और व्यवहारिक स्तर पर पार्टी के वैचारिक विस्तार की सरगर्मीयों का हिस्से बने रहे। नेशनल हेराल्ड और क़ौमी आवाज़ (अंग्रेज़ी और उर्दू दैनिक) में कार्यरत रहे और यादगार सहाफ़ती ख़िदमात अंजाम दीं।
17 नवंबर 1932 को ओरई ज़िला जालौन (उतर प्रदेश) में पैदा हुए। ओरई और भोपाल में आरम्भिक शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद लखनऊ यूनीवर्सिटी से दर्शनशास्त्र में एम.ए.किया और फिर उसी शहर में सारी ज़िंदगी बसर की।
आबिद सुहैल ने यूनीवर्सिटी के ज़माने में ही अफ़साने लिखने शुरू कर दिये थे और बहुत जल्द उन्हें एक संजीदा अफ़्साना निगार के तौर पर भी तस्लीम किया जाने लगा था। पत्रकारिता का अनुभव उनकी कहानियों की संरचना में बहुत सहायक रहा। उनकी कहानियां समाज के बराह-ए-रास्त अनुभवों से रचित सृजनात्मक चिन्तन से संयोजित होती हैं।
अफ़्सानों के इलावा उन्होंने मशहूर इल्मी-ओ-अदबी शख़्सियात के रेखाचित्र भी लिखे।जो ‘खुली किताब’ के नाम से पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ।
ज़िंदगी के आख़िरी बरसों में उन्होंने ‘जो याद रहा के नाम से’ अपनी आत्मकथा लिखी। जिसकी गिनती उर्दू की कुछ अच्छी आत्म कथाओं में होती है। इसके इलावा फ़िक्शन की आलोचना पर लिखे गये उनके आलेख भी क़दर की निगाह से देखे गये।संबंधित टैग
प्राधिकरण नियंत्रण :लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस नियंत्रण संख्या : no99013643
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1989
-
