- पुस्तक सूची 180885
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ90
बाल-साहित्य1997
नाटक / ड्रामा924 एजुकेशन / शिक्षण347 लेख एवं परिचय1378 कि़स्सा / दास्तान1664 स्वास्थ्य108 इतिहास3355हास्य-व्यंग604 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1143
पत्र725 जीवन शैली30 औषधि980 आंदोलन270 नॉवेल / उपन्यास4284 राजनीतिक349 धर्म-शास्त्र4794 शोध एवं समीक्षा6719अफ़साना2672 स्केच / ख़ाका237 सामाजिक मुद्दे111 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2019पाठ्य पुस्तक442 अनुवाद4200-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर70
- दीवान1254
- दोहा50
- महा-काव्य99
- व्याख्या186
- गीत63
- ग़ज़ल1272
- हाइकु11
- हम्द61
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1584
- कह-मुकरनी6
- कुल्लियात574
- माहिया20
- काव्य संग्रह4897
- मर्सिया387
- मसनवी736
- मुसद्दस44
- नात592
- नज़्म1216
- अन्य84
- पहेली14
- क़सीदा179
- क़व्वाली16
- क़ित'अ68
- रुबाई264
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं16
- सलाम35
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद75
- वासोख़्त24
आदिल रशीद का परिचय
मूल नाम : सय्यद मंजूरुल हक़
जन्म : 20 Nov 1920 | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
निधन : 03 Jan 1972 | मुंबई, महाराष्ट्र
पहचान: लोकप्रिय साहित्य (मक़बूल-ए-आम अदब) के प्रसिद्ध उपन्यासकार, बहुप्रज लेखक, अफ़सानानिगार और संपादक।
उर्दू साहित्य के इतिहास में लोकप्रिय साहित्य हमेशा पाठकों की पसंद रहा है, लेकिन आलोचकों ने हमेशा इसे नज़रअंदाज़ किया। इसी श्रेणी के एक महान लेखक आदिल रशीद थे, जिनके उपन्यास एक दौर में हाथों-हाथ लिए जाते थे, लेकिन वक़्त की गर्द ने उनके फन (कला) को वह मक़ाम नहीं दिया जिसके वे हक़दार थे।
आदिल रशीद का असली नाम सैयद मंज़ूर-उल-हक़ था। उनका जन्म 20 नवंबर 1920 को अपने ननिहाल नारा (ज़िला इलाहाबाद) में हुआ था। वह एक ज़मींदार और शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता सैयद मोहम्मद फ़ज़्ल-उल-हक़ इलाके के रईस ज़मींदार थे, जबकि उनके दादा और परदादा माहिर हकीम थे। उनकी माँ अमतुल-फ़ातिमा उन्हें अदीब (लेखक) या बैरिस्टर बनाना चाहती थीं, लेकिन जब आदिल सिर्फ 8 साल के थे, उनका इंतक़ाल हो गया। कुदरत ने माँ की यह तमन्ना पूरी की और आदिल रशीद उर्दू साहित्य के एक बड़े स्तंभ बनकर उभरे।
सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली कहानी 'क़र्ज़' लिखी, जो कानपुर के रिसाले (पत्रिका) 'मस्तूरात' में छपी। शुरुआत में वह 'सैयद मोहम्मद मंज़ूर-उल-हक़ मईवी' के नाम से लिखते थे, बाद में शायरी में 'आदिल' तखल्लुस अपनाया और फिर 'आदिल रशीद' के नाम से शोहरत पाई। उनकी ज़िंदगी कड़े संघर्षों से भरी रही; बचपन में माता-पिता का साया उठना और रोज़गार की तलाश उन्हें दिल्ली और फिर मुंबई ले गई।
मुंबई में उन्होंने फ़िल्मी कहानीकार के रूप में कड़ी मेहनत की। हालाँकि उन्हें ए.आर. कारदार जैसे फ़िल्मकारों के झूठे वादों की वजह से फाकाकशी (भुखमरी) भी झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह 'शाहिद' और 'हिजाब' जैसी मशहूर पत्रिकाओं के संपादक भी रहे। उनके व्यक्तित्व का एक उज्ज्वल पहलू दूसरों की मदद करना था। उन्होंने हाजरा मसरूर जैसे लेखकों को अदबी दुनिया से रूबरू कराया और कृष्ण चंदर जैसे दोस्तों की आर्थिक मदद के लिए अपने काम तक की कुर्बानी दी।
आदिल रशीद एक बहुत तेज़ लिखने वाले लेखक थे। उन्होंने लगभग 150 उपन्यास, कई कहानियाँ और तज़किरे (जीवनी) लिखे। उनका पहला उपन्यास 'मीर साहब' (1944) बेहद मशहूर हुआ। उनके अन्य प्रसिद्ध उपन्यासों में 'लरज़ते आँसू', 'दुल्हन', 'सुषमा' और 'चौदहवीं का चाँद' शामिल हैं। उपन्यासों के अलावा उनकी अहम सेवाओं में रिपोर्ताज 'खिज़ाँ के फूल' (1949), 'फ़िल्मी मोहरे' (जिसमें दिलीप कुमार और नरगिस जैसी 44 हस्तियों के खाके हैं) और बच्चों के लिए 'चूहों की हुकूमत' जैसी कहानियाँ शामिल हैं। उनका अंदाज़-ए-बयां सादा लेकिन दिलकश था।
निधन: 3 जनवरी 1972 को मुंबई के नानावती अस्पताल में उनका इंतक़ाल हुआ।
सहायक लिंक : | http://www.bio-bibliography.com/authors/view/11414
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ90
बाल-साहित्य1997
-
