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असरार आलम

1953

इस्लामी विचारक, कई भाषाओं के विशेषज्ञ

इस्लामी विचारक, कई भाषाओं के विशेषज्ञ

असरार आलम का परिचय

जन्म :झारखण्ड

पहचान: इस्लामी चिंतक, भाषाविद्

इसरार आलम का जन्म 1953 में भारत के राज्य झारखंड में हुआ। इस्लामी हलकों में उन्हें विशेष रूप से यहूदीवाद, ज़ायोनिज़्म और दज्जालियत पर अपनी आलोचनात्मक और विश्लेषणात्मक रचनाओं के कारण व्यापक प्रसिद्धि प्राप्त हुई।

इसरार आलम अपनी विद्वत्ता और भाषाई क्षमता के कारण अपने समकालीनों में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। उन्हें अनेक भाषाओं पर समान अधिकार प्राप्त है, जबकि वे अक्कादी और सुमेरी जैसी प्राचीन मृत भाषाओं से भी परिचित हैं। उनकी रचनाओं में इतिहास, धर्म, दर्शन, भाषाविज्ञान, वैश्विक राजनीति और इस्लामी चिंतन का गहरा अध्ययन दिखाई देता है।

उन्होंने पत्रकारिता और विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े रहकर भी सेवाएँ दीं। वे दिल्ली से प्रकाशित जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की अंग्रेज़ी पत्रिका Radiance के उप-संपादक रहे, जबकि नवंबर 1995 से सितंबर 1996 तक Urdu Book Review के मानद संपादक भी रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने इस्लामिक फ़िक़्ह अकादमी, इंडिया में अनेक शैक्षिक और विस्तार व्याख्यान प्रस्तुत किए।

इसरार आलम की रचनाओं में समकालीन वैचारिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक विषयों को केंद्रीय महत्व प्राप्त है। उनकी प्रमुख पुस्तकों में दज्जाल (तीन खंड), मारका-ए-दज्जाल-ए-अकबर, इस्लाम और इक्कीसवीं सदी की चुनौती, उम्मत का संकट, आलम-ए-इस्लाम की नैतिक स्थिति, आलम-ए-इस्लाम की आध्यात्मिक स्थिति, हिंदुत्व, फ़ित्ना-ए-दज्जाल-ए-अकबर: ख़तरात व तदाबीर, या सारियाल जबल! क्या दज्जाल की आमद आमद है, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का परिचय और उनका कार्य-तंत्र तथा सर सैयद की बसीरत शामिल हैं।

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