असरार जामई के शेर
कुछ देर दुम हिलाइए आक़ा के सामने
फैला के पाँव घर पे फिर आराम कीजिए
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यारान-ए-हम-मज़ाक़ की महफ़िल सजाइए
जो मुत्तफ़िक़ न हो उसे बदनाम कीजिए
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ज़िंदगी हो मिरी नेताओं की सूरत या-रब
हो फ़क़त अपनी ग़रज़ से ही मोहब्बत या-रब
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रहूँ आज़ाद न हो क़ैद-ए-मक़ामी मालिक
दिल बदलना हो मिरा शग़्ल-ए-दवामी मालिक
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अपनी ग़रज़ के आगे सदा-ए-ज़मीर क्या
सारे तकल्लुफ़ात को नीलाम कीजिए
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कल जो क़ातिल थे वही आए मसीहा बन कर
रहिए इन लोगों से हुश्यार चना जोर गरम
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दल-बदल जितने हैं कहते हैं ये सीना ताने
हम हैं 'ग़ालिब' के तरफ़-दार चना जोर गरम
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जनता का ख़ून बेचिए पैसे कमाइए
क्यों शिकवा-हाए गर्दिश-ए-अय्याम कीजिए
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ये फ़न पे तब्सिरा तो करते नहीं ज़रा भी
बस शख़्सियत का उन की ढोते फिरेंगे लाशा
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लीडर जो नज़र आए तो बोलो ये अदब से
तक़रीर में तुम गर्मी-ए-व्हिस्की से जिला दो
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