- पुस्तक सूची 182702
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ94
बाल-साहित्य1992
नाटक / ड्रामा927 एजुकेशन / शिक्षण346 लेख एवं परिचय1394 कि़स्सा / दास्तान1609 स्वास्थ्य105 इतिहास3320हास्य-व्यंग611 पत्रकारिता203 भाषा एवं साहित्य1724 पत्र750
जीवन शैली30 औषधि986 आंदोलन273 नॉवेल / उपन्यास4338 राजनीतिक357 धर्म-शास्त्र4814 शोध एवं समीक्षा6644अफ़साना2690 स्केच / ख़ाका244 सामाजिक मुद्दे110 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2050पाठ्य पुस्तक452 अनुवाद4275महिलाओं की रचनाएँ5826-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1291
- दोहा50
- महा-काव्य103
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1268
- हाइकु11
- हम्द58
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1606
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात585
- माहिया20
- काव्य संग्रह4894
- मर्सिया387
- मसनवी752
- मुसद्दस44
- नात592
- नज़्म1220
- अन्य85
- पहेली15
- क़सीदा183
- क़व्वाली17
- क़ित'अ68
- रुबाई273
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
दारा शिकोह का परिचय
पहचान: मुग़ल शहज़ादा, सूफ़ी विचारक, अनुवादक, धार्मिक सहिष्णुता के समर्थक और “मज्मउल बहरैन” के लेखक
दारा शिकोह का जन्म 20 मार्च 1615 को अजमेर, राजस्थान में हुआ। वे मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और मलिका मुमताज़ महल के सबसे बड़े पुत्र तथा मुग़ल सल्तनत के नामज़द उत्तराधिकारी थे। मुग़ल दरबार में उन्हें “शाह-ए-बुलंद इक़बाल” और “पादशाहज़ादा-ए-बुज़ुर्ग मर्तबा” जैसे ख़िताब दिए गए। अपनी असाधारण बुद्धिमत्ता, व्यापक अध्ययन, सूफ़ियाना मिज़ाज और धार्मिक उदारता के कारण वे दरबार और विद्वानों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थे। उनकी बड़ी बहन जहाँआरा बेगम से भी उनका गहरा आध्यात्मिक और बौद्धिक संबंध था।
दारा शिकोह ने फ़ारसी, अरबी, हिंदी और संस्कृत भाषाओं में दक्षता प्राप्त की। उनकी रुचि प्रारंभ से ही दर्शन, सूफ़ीवाद और आध्यात्मिक चिंतन की ओर थी। वे क़ादिरी सिलसिले के सूफ़ियों, विशेषकर मियाँ मीर, मुल्ला शाह बदख्शी और सरमद काशानी से अत्यधिक प्रभावित थे। इसी श्रद्धा के कारण उन्होंने “क़ादिरी” तख़ल्लुस अपनाया और फ़ारसी कविता में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके फ़ारसी दीवान में ग़ज़लें, रुबाइयाँ और क़सीदे शामिल हैं।
दारा शिकोह की सबसे बड़ी पहचान इस्लामी सूफ़ीवाद और हिंदू वेदांत दर्शन के बीच वैचारिक सामंजस्य स्थापित करने की कोशिशों से जुड़ी है। उन्होंने संस्कृत से पचास उपनिषदों का फ़ारसी अनुवाद “सिर्र-ए-अकबर” के नाम से किया, ताकि मुस्लिम विद्वान और फ़ारसी जानने वाले भारतीय दर्शन से परिचित हो सकें। अपनी भूमिका में उन्होंने यह विचार भी व्यक्त किया कि क़ुरआन में वर्णित “किताब-ए-मक़नून” से आशय उपनिषद भी हो सकते हैं।
उनकी प्रसिद्ध कृति “मज्मउल बहरीन” भारतीय उपमहाद्वीप में अंतरधार्मिक बौद्धिक संवाद की एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ मानी जाती है। इस ग्रंथ में उन्होंने सूफ़ीवाद और वेदांत की अवधारणाओं तथा आध्यात्मिक शब्दावली के बीच समानताओं को स्पष्ट किया। इसके अतिरिक्त “सफ़ीनतुल औलिया”, “सकीनतुल औलिया”, “रिसाला-ए-हक़नुमा”, “हसनातुल आरिफ़ीन” और “अक्सीर-ए-आज़म” भी उनकी महत्त्वपूर्ण रचनाएँ हैं।
दारा शिकोह कला, चित्रकला, सुलेख और स्थापत्य कला के भी बड़े संरक्षक थे। उनकी सौंदर्यप्रियता का प्रमाण “दारा शिकोह एल्बम” है, जिसमें चित्रकला और सुलेख के दुर्लभ नमूने संग्रहीत हैं। यह एल्बम उन्होंने अपनी पत्नी नादिरा बानो बेगम के लिए तैयार करवाया था। लाहौर में नादिरा बानो बेगम का मक़बरा, मियाँ मीर की दरगाह, दिल्ली की दारा शिकोह लाइब्रेरी और कश्मीर की कुछ इमारतें भी उनकी सरपरस्ती से जुड़ी मानी जाती हैं।
1657 में शाहजहाँ की बीमारी के बाद मुग़ल सल्तनत में उत्तराधिकार का युद्ध आरंभ हुआ। दारा शिकोह को अपने भाई औरंगज़ेब का सामना करना पड़ा, जो धार्मिक दृष्टि से अधिक कट्टर और राजनीतिक तथा सैन्य रणनीति में अधिक मज़बूत सिद्ध हुए। कई युद्धों में पराजित होने के बाद दारा शिकोह को गिरफ़्तार कर लिया गया और उन पर अधर्म तथा धार्मिक विचलन के आरोप लगाए गए।
निधन: 30 अगस्त 1659 को औरंगज़ेब के आदेश पर उनकी हत्या कर दी गई। बाद में उन्हें दिल्ली में हुमायूँ के मक़बरे के परिसर में दफ़न किया गया।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Dara_Shikoh
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ94
बाल-साहित्य1992
-
