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फ़ातिमा हसन

1940 - 1988 | इलाहाबाद, भारत

फ़ातिमा हसन का परिचय

बा-कमाल मुसन्निफ़ा बेगम फ़ातिमा हसन (1940–1998) ने छः किताबें तसनीफ़ कीं। इसके अलावा वे ऑल इंडिया रेडियो, लखनऊ से मुतअद्दिद उर्दू प्रोग्रामों से भी वाबस्ता रहीं और उनका कलाम मशहूर-ओ-मारूफ़ मैगज़ीनों और रिसालों में शाया होता रहा।
उनकी तीन किताबें मुख़्तसर कहानियों पर मबनी हैं ‘चौथा शौहर’, ‘आवारा बगूले’ और ‘गुल-ओ-ख़ार’। इसके अलावा ‘क़बाइली कहानियाँ’ बच्चों के लिए लिखी गई दिलचस्प कहानियों का मजमूआ है।
उन्होंने अपने वालिद-ए-मोहतरम प्रोफ़ेसर सय्यद मुहम्मद ज़ामिन अली की दो किताबें,‘ग़ज़लियात-ए-ज़ामिन’ और ‘मजमूआ-ए-क़साइद-ओ-सलाम’ मुरत्तब कर के उनके इंतिक़ाल के बाद शाया करवाया।
प्रोफ़ेसर सय्यद मुहम्मद ज़ामिन अली ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के शोबा-ए-उर्दू की बुनियाद रखी और उसके सरपरस्त-ए-आला रहे। वो एक मारूफ़ शायर, मुसन्निफ़ और माहिर-ए-तालीम थे। उर्दू ज़बान-ओ-अदब की ख़िदमत और उसके फ़रोग़ के सिलसिले में उनकी ख़िदमात के एतिराफ़ में हुकूमत-ए-हिंद के महकमा-ए-डाक ने 1980 में उनके नाम का डाक टिकट भी जारी किया।

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