- पुस्तक सूची 179741
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1988
नाटक / ड्रामा919 एजुकेशन / शिक्षण344 लेख एवं परिचय1379 कि़स्सा / दास्तान1585 स्वास्थ्य105 इतिहास3275हास्य-व्यंग608 पत्रकारिता202 भाषा एवं साहित्य1705 पत्र738
जीवन शैली30 औषधि981 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4298 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4755 शोध एवं समीक्षा6593अफ़साना2681 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2037पाठ्य पुस्तक451 अनुवाद4249महिलाओं की रचनाएँ5829-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1278
- दोहा48
- महा-काव्य101
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1258
- हाइकु11
- हम्द52
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1597
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात580
- माहिया20
- काव्य संग्रह4853
- मर्सिया386
- मसनवी746
- मुसद्दस42
- नात580
- नज़्म1193
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
इरफ़ान अब्बासी का परिचय
मूल नाम : मोहम्मद इरफ़ान अब्बासी
जन्म : 13 Aug 1924 | बाराबंकी, उत्तर प्रदेश
निधन : 04 Jan 2012 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पहचान: प्रमुख तज़किरा-निगार, लेखक एवं संकलक
इरफ़ान अब्बासी का जन्म 13 अगस्त 1924 को गढ़ी भलोल, जिला बाराबंकी के एक विद्वतापूर्ण परिवार में हुआ। उनके परदादा मौलाना अब्दुर्रज़्ज़ाक, दादा मौलाना अब्दुर्रहमान और पिता मौलाना नौमान दीनि उलूम के विद्वान थे, जबकि उनके पिता को शायरी और साहित्य का भी उत्तम रसास्वाद था और वे "सोज़" तख़ल्लुस करते थे। इसी शैक्षिक और साहित्यिक वातावरण ने इरफ़ान अब्बासी की व्यक्तित्व-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक शिक्षा मकतब में प्राप्त की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पूर्ण की। इसके साथ ही उन्होंने होम्योपैथी में डिप्लोमा भी किया। लगभग 1947 में उन्होंने उत्तर प्रदेश सिविल सचिवालय में नौकरी शुरू की और लंबी सरकारी सेवा के बाद 1984 में सेवानिवृत्त हुए।
इरफ़ान अब्बासी का मुख्य क्षेत्र तज़किरा-निगारी था, जिसमें उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया। उनकी सबसे महत्वपूर्ण कृति "तज़किरा शुअरा-ए उत्तर प्रदेश" है, जो कई खंडों में प्रकाशित एक महान शोध कार्य है। इसमें उन्होंने हजारों शायरों के जीवन-वृत्त और काव्य को संकलित किया, जो उर्दू साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
उन्होंने अपने जीवन में लगभग 75 पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया, जिनमें प्रमुख हैं:
"आप", "आप थे", "आप हैं", "तज़किरा शुअरा-ए रेख़्ती", "दबिस्तान अमीर मीनाई", "नस्र निगारान उर्दू", "उर्दू अदब में कौन क्या?", "उर्दू शायरी में हिंदुस्तानियत", "इशारिया शुअरा-ए लखनऊ", "लखनऊ की अदबी व सांस्कृतिक अंजुमनें" आदि।निधन: 4 जनवरी 2012 को उनका निधन हुआ।
संबंधित टैग
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ86
बाल-साहित्य1988
-
