- पुस्तक सूची 182695
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ88
बाल-साहित्य1990
नाटक / ड्रामा926 एजुकेशन / शिक्षण345 लेख एवं परिचय1394 कि़स्सा / दास्तान1605 स्वास्थ्य105 इतिहास3306हास्य-व्यंग611 पत्रकारिता203 भाषा एवं साहित्य1717 पत्र748
जीवन शैली30 औषधि983 आंदोलन273 नॉवेल / उपन्यास4333 राजनीतिक355 धर्म-शास्त्र4778 शोध एवं समीक्षा6636अफ़साना2690 स्केच / ख़ाका245 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2043पाठ्य पुस्तक452 अनुवाद4263महिलाओं की रचनाएँ5826-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1290
- दोहा50
- महा-काव्य102
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1267
- हाइकु11
- हम्द58
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1607
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात585
- माहिया20
- काव्य संग्रह4888
- मर्सिया387
- मसनवी750
- मुसद्दस44
- नात588
- नज़्म1217
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा183
- क़व्वाली17
- क़ित'अ68
- रुबाई273
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
कालीदास गुप्ता रज़ा का परिचय
उपनाम : 'रज़ा'
मूल नाम : कालीदास गुप्ता
जन्म : 25 Aug 1925 | सिकन्दरपुर, पंजाब
निधन : 21 Mar 2001 | दिल्ली, भारत
LCCN :n82077030
अब कोई ढूँड-ढाँड के लाओ नया वजूद
इंसान तो बुलंदी-ए-इंसाँ से घट गया
पहचान: प्रमुख ग़ालिब-विशेषज्ञ, शोधकर्ता, संपादक, कवि और बहुआयामी साहित्यकार
काली दास गुप्ता ‘रज़ा’ उर्दू जगत के प्रमुख शोधकर्ता, संपादक और विशेष रूप से ग़ालिब-विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने ग़ालिब के जीवन और काव्य के शोध व संपादन में असाधारण सेवाएँ दीं और संपादन, आलोचना तथा कविता पर महत्वपूर्ण विद्वत्तापूर्ण कार्य किया। उनकी केवल एक पुस्तक “दीवान-ए-ग़ालिब ऐतिहासिक क्रम से” ही साहित्य के इतिहास में उनका नाम जीवित रखने के लिए पर्याप्त है।काली दास गुप्ता ‘रज़ा’ का जन्म 25 अगस्त 1925 को जालंधर ज़िले के मुकंदपुर में हुआ। अपने पूर्वजों से मिले संस्कार उनकी व्यक्तित्व का हिस्सा थे। उनकी मातृभाषा पंजाबी थी, लेकिन उर्दू उनके अभिव्यक्ति और भावनाओं की मूल भाषा बनी, जिससे उन्हें गहरा लगाव था।
प्रारंभिक शिक्षा के बाद वे व्यावहारिक जीवन से जुड़े। पेशे से वे व्यापारी थे और व्यापार के सिलसिले में लगभग बीस वर्ष पूर्वी अफ्रीका (नैरोबी) में रहे। अली सरदार जाफ़री के अनुसार वे जीविका के लिए व्यापार करते थे और जीवन को सुंदर बनाने के लिए साहित्य की सेवा करते थे। बाद में उनके जीवन का बड़ा हिस्सा मुंबई में बीता, जहाँ वे अपने व्यवसाय के साथ-साथ निरंतर शैक्षिक और शोध कार्यों में लगे रहे।
उनके विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व का सबसे प्रमुख पक्ष ग़ालिब-चिंतन था। वे ग़ालिब के प्रेमी और दीवाने थे और उनका जुनून ऐसा था कि वे दिन-रात ग़ालिब पर शोध में लगे रहते। उन्होंने ग़ालिब पर लगभग बीस पुस्तकें लिखीं, जिनमें मुतअल्लिक़ात-ए-ग़ालिब, ग़ालिबियात चंद उनवानात, दीवान-ए-ग़ालिब (अक्सी), ग़ालिब दरून-ए-ख़ाना, पंज आहंग में मकातीब-ए-ग़ालिब और तफ़हीम-ए-ग़ालिब के दो हर्फ़ आदि शामिल हैं। ग़ालिब के अलावा उन्होंने दाग़, ज़ौक़, आतिश और चकबस्त के काव्य पर भी शोध किया।
रज़ा साहब एक परिपक्व कवि भी थे और उस्ताद जोश मलसियानी के शिष्य होने के नाते उनका संबंध दाग़ परंपरा से था। उनके काव्य-संग्रहों में शोला-ए-ख़ामोश, शोरिश-ए-पिन्हां, शाख़-ए-गुल और ग़ज़ल गुलाब शामिल हैं। उनकी कविता में स्वाभाविकता, प्रवाह और भाषा पर पकड़ स्पष्ट दिखती है। वे उर्दू के साथ-साथ हिंदी शब्दों का भी सुंदर प्रयोग करते थे।
उन्हें पुस्तकों से जुनून की हद तक प्रेम था। उनकी निजी लाइब्रेरी में दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों का बड़ा संग्रह था, जिस पर उन्होंने बहुत धन खर्च किया। उनके अध्ययन की व्यापकता और स्मरण-शक्ति पर समकालीन लोग दंग रह जाते थे।
वे एक गरिमामय, संवेदनशील और गंगा-जमुनी तहज़ीब के संरक्षक इंसान थे। मुंबई में उनके घर और दफ़्तर साहित्यकारों के लिए खुले रहते, जहाँ वे बिना भेदभाव सबका स्वागत करते। जीवन के अंतिम वर्षों में निजी और बाहरी कठिनाइयों के कारण उन्होंने संघर्ष भरा समय देखा, मगर उसे धैर्य और मुस्कान के साथ बिताया।
निधन: 21 मार्च 2001 को मुंबई में उनका देहांत हुआ۔
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Kalidas_Gupta_Riza
प्राधिकरण नियंत्रण :लाइब्रेरी ऑफ कॉंग्रेस नियंत्रण संख्या : n82077030
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ88
बाल-साहित्य1990
-
