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महेनद्र नाथ

1923 - 1974

कहानी 12

उद्धरण 2

तवाइफ़ीयत का मस'अला तवाइफ़ों को गाली देने से हल ना होगा बल्कि औरतों को त'अ्लीम देने से, औरतों की भूक मिटाने से, औरतों पर दुनिया के दरवाज़े खोलने से हल होगा। जब तक ये काम हुकूमत नहीं करेगी तवाइफ़ें क़ायम रहेंगी।

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मुंबई में मुझे तीन चीज़ें पसंद आई हैं, समुंद्र, नारीयल के दरख़्त और बंबई की ऐक्ट्रस। अस्ल में इन तीन चीज़ों से बंबई ज़िंदा है, अगर इन तीन चीज़ों को बंबई से निकाल दिया जाये तो बंबई, बंबई ना रहे, शायद दिल्ली बन जाये या लाहौर।

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पुस्तकें 41

Aadmi Aur Sikke

 

1951

Aadmi Aur Sikke

 

1955

Armanon Ki Sej

 

1965

Barat

 

 

Dard Ka Rishta

 

1966

Dastan Meri Zikr Tera

 

2000

Dil Kisi Ka Dost Nahin

 

1959

Dushman

 

 

Fakhr Ki Bat

 

1960

Gaali

 

1948