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मक़बूल जहाँगीर का परिचय
पहचान: लोकप्रिय कथाकार, अनुवादक और बाल साहित्यकार
मक़बूल जहाँगीर (मूल नाम: मक़बूल इलाही) का जन्म 24 जनवरी 1928 को हुआ। वे पाकिस्तान के उन प्रमुख लेखकों और अनुवादकों में गिने जाते हैं जिन्होंने उर्दू के लोकप्रिय साहित्य, विशेष रूप से साहसिक, जासूसी, शिकारी और भयावह कथाओं को नई दिशा दी। उर्दू डाइजेस्ट साहित्य, बाल साहित्य और अनुवाद की दुनिया में उनका नाम विशेष महत्व रखता है।
मक़बूल जहाँगीर लंबे समय तक प्रसिद्ध पत्रिका “सियारा डाइजेस्ट” के संपादक रहे। उनकी संपादकीय देखरेख में यह पत्रिका आम पाठकों, विशेषकर युवाओं में अत्यंत लोकप्रिय हुई और साहसिक तथा जासूसी साहित्य के प्रति रुचि बढ़ी। उनकी रचनाओं में रोमांच, रहस्य, प्रवाह और कथावाचन की ऐसी आकर्षक शैली पाई जाती थी कि पाठक शुरू से अंत तक बंधा रहता था।
उन्होंने अनेक मौलिक पुस्तकें और विश्व साहित्य के महत्वपूर्ण अनुवाद प्रस्तुत किए। उनकी प्रसिद्ध कृतियों और अनुवादों में “मौत के ख़ुतूत”, “हैबतनाक अफ़साने”, “पाँच ख़ौफ़नाक कहानियाँ”, “नाक़ाबिले फ़रामोश”, “फ़रार होने तक”, “शिकारियों का क़ातिल” और “अनाई के आदमख़ोर वहशी” शामिल हैं। भय, रोमांच, जंगल, शिकार और रहस्यमय वातावरण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना उनकी विशेषता थी।
मक़बूल जहाँगीर का सबसे बड़ा साहित्यिक योगदान “दास्तान-ए-अमीर हमज़ा” का संक्षिप्त रूप और पुनर्संपादन माना जाता है। मूल दास्तान की विशाल और विस्तृत परंपरा को उन्होंने बच्चों और आम पाठकों के लिए अत्यंत रोचक और सरल शैली में कई भागों में प्रस्तुत किया। इसी दास्तान के माध्यम से उर्दू साहित्य के लोकप्रिय पात्र “अम्र अय्यार” को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी यह सेवा उर्दू दास्तानवी साहित्य को जनसामान्य तक जीवित रखने की एक महत्वपूर्ण कोशिश मानी जाती है।
निधन: मक़बूल जहाँगीर का निधन 24 अक्टूबर 1985 को हुआ।
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