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मसरूर जहाँ का परिचय
उपनाम : 'मसरूर जहाँ'
मूल नाम : मसरूर ख़याल
जन्म : 08 Jul 1938 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
निधन : 22 Sep 2019 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश
LCCN :n90610272
पहचान: मशहूर उपन्यासकार और कहानीकार, तथा उर्दू साहित्य में सामाजिक यथार्थ की महत्वपूर्ण आवाज़।
बेगम मस्रूर जहाँ (जन्म नाम: मस्रूर ख़याल) का जन्म 8 जुलाई 1938 को लखनऊ के एक साहित्यिक परिवार में हुआ। उनके दादा शेख मेहदी हुसैन नासिरी लखनवी प्रसिद्ध शायर और शिक्षक थे। उनके शिष्यों में फ़िराक़ गोरखपुरी और डॉ. एजाज़ हुसैन शामिल थे। उनके पिता नसीर हुसैन भी मशहूर शायर (तखल्लुस: ख़याल) और इस्लामिया कॉलेज, लखनऊ में शिक्षक थे।
सिर्फ 16 साल की उम्र में उनकी शादी सैयद मुर्तज़ा अली ख़ान से हो गई। उनकी ज़िंदगी में कई दुखद घटनाएँ हुईं, जिनमें दो भाइयों और एक जवान बेटे की मौत शामिल है।
उनकी पहली कहानी “वो कौन थी?” 1960 में ‘कौमी आवाज़’ में छपी। पहला उपन्यास “डिसीजन” 1962 में पाकिस्तान में प्रकाशित हुआ। शुरुआत में उन्होंने “मस्रूर ख़याल” नाम से लिखा, बाद में “मस्रूर जहाँ” के नाम से प्रसिद्ध हुईं।
उनकी रचनाएँ ‘हरीम’ और ‘बीसवीं सदी’ जैसे प्रसिद्ध पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहीं। उन्होंने कई उपन्यास लिखे, लेकिन आलोचकों के अनुसार उनकी कहानियाँ अधिक प्रभावशाली हैं।
उनकी रचनाओं में मध्यम वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक के जीवन के विभिन्न पहलू मिलते हैं। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं की समस्याएँ, घरेलू दबाव, सामाजिक मूल्य और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को विषय बनाया। उनका लेखन संवेदनशील, संतुलित और यथार्थवादी है।
उनका उपन्यास “ताबाँ” (1970) बहुत प्रसिद्ध हुआ। इसके अलावा “जब गिले मिट गए” और “कहाँ हो तुम” भी लोकप्रिय हैं।
“नई बस्ती” (1982) में उन्होंने शहर के गरीब लोगों की समस्याओं को दिखाया।
उनका कहानी संग्रह “तेरे मेरे दुख” मानवीय दर्द को गहराई से व्यक्त करने के लिए सराहा गया।उन्हें 2010 और 2015 में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार और 2017 में हिंदुस्तान टाइम्स वीमेंस अवॉर्ड मिला।
निधन: 22 सितंबर 2019 को लखनऊ में ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनका निधन हो गया۔
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Masroor_Jahan
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