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मोहम्मद हुसैन आज़ाद के लेख
दर बाब-ए-नज़्म और कलाम-ए-मौज़ूं
(फ़रमाइश के अनुसार) मौलवी साहब का यह भाषण 'रिसाला अंजुमन' (पत्रिका) के अगस्त 1868 ई. के अंक से लिया गया है। "फ़रमाइश के अनुसार" शब्द उन्होंने अपनी कलम से बाद में लिखे हैं। इसी लेख ने नज़र-ए-सानी (पुनरीक्षण) से नया नूर हासिल किया है। कुछ जगहों पर कुछ
फ़ीला लोजिया: लुग़ात और ज़बानों की फ़ल्सफ़ी तहक़ीक़ात के उसूल
फिलालोजिया: शब्दकोशों और भाषाओं की दार्शनिक खोज के उसूल 1 / 7 यह यूनान के दार्शनिकों की एक पुरानी विद्या है। इससे अलग-अलग ज़बानों की जड़ें और उनका एक-दूसरे से ताल्लुक़ मालूम हो जाता है। अरब और फ़ारस जहाँ से पहले हमें इल्म के भंडार मिले, उनमें
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