- पुस्तक सूची 181565
-
-
पुस्तकें विषयानुसार
-
गतिविधियाँ85
बाल-साहित्य1984
नाटक / ड्रामा923 एजुकेशन / शिक्षण343 लेख एवं परिचय1385 कि़स्सा / दास्तान1593 स्वास्थ्य105 इतिहास3280हास्य-व्यंग607 पत्रकारिता201 भाषा एवं साहित्य1706 पत्र742
जीवन शैली30 औषधि981 आंदोलन272 नॉवेल / उपन्यास4296 राजनीतिक354 धर्म-शास्त्र4753 शोध एवं समीक्षा6596अफ़साना2681 स्केच / ख़ाका242 सामाजिक मुद्दे109 सूफ़ीवाद / रहस्यवाद2038पाठ्य पुस्तक450 अनुवाद4247महिलाओं की रचनाएँ5827-
पुस्तकें विषयानुसार
- बैत-बाज़ी14
- अनुक्रमणिका / सूची4
- अशआर68
- दीवान1280
- दोहा48
- महा-काव्य101
- व्याख्या181
- गीत63
- ग़ज़ल1262
- हाइकु11
- हम्द54
- हास्य-व्यंग31
- संकलन1600
- कह-मुकरनी7
- कुल्लियात582
- माहिया20
- काव्य संग्रह4866
- मर्सिया387
- मसनवी746
- मुसद्दस43
- नात582
- नज़्म1203
- अन्य82
- पहेली15
- क़सीदा182
- क़व्वाली17
- क़ित'अ67
- रुबाई272
- मुख़म्मस15
- रेख़्ती12
- शेष-रचनाएं17
- सलाम34
- सेहरा12
- शहर आशोब, हज्व, ज़टल नामा17
- तारीख-गोई26
- अनुवाद74
- वासोख़्त25
मोहीउद्दीन नवाब का परिचय
पहचान: लोकप्रिय उपन्यासकार, यथार्थवादी (हकीकत पसंद) और मनोविज्ञान के गहरे जानकार लेखक।
मोहिउद्दीन नवाब का जन्म 1930 में अविभाजित भारत के बंगाल प्रांत के खड़गपुर शहर में हुआ था। पाकिस्तान बनने के बाद उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की ओर हिजरत की, और बांग्लादेश बनने के बाद वह दोबारा हिजरत करके पाकिस्तान आए और कराची को अपना स्थायी निवास बनाया। उनके जीवन की इन दो हिजरतों ने उनके मन, सोच और रचनात्मक समझ पर गहरे प्रभाव छोड़े, जिनकी झलक उनके उपन्यासों में बार-बार दिखाई देती है।
हालाँकि उनका जन्म बंगाल में हुआ था, लेकिन उनके घर का माहौल उर्दू भाषा से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण उर्दू उनकी वैचारिक और रचनात्मक भाषा बनी। वह निबंधकार, कहानीकार और कवि भी थे, लेकिन उनकी असली पहचान एक उपन्यासकार के रूप में है। उनकी कलम मानवीय मनोविज्ञान, सामाजिक असमानताओं, राजनीतिक समझ, प्रेम और जीवन की कड़वी और मीठी सच्चाइयों का आईना है।
मोहिउद्दीन नवाब के उपन्यास आकार में संक्षिप्त भी हैं और हज़ारों पन्नों के लंबे भी, लेकिन उनकी कहानियों में दिलचस्पी, तालमेल और वैचारिक गहराई हर जगह बनी रहती है। उनका विश्व प्रसिद्ध उपन्यास "देवता" उर्दू साहित्य के इतिहास का एक अनोखा अध्याय है, जिसके बारे में नवाब साहब का यह दावा मशहूर है कि जो व्यक्ति इसके सौ पन्ने पढ़ ले, वह इसे पूरा किए बिना नहीं रह सकता।
मोहिउद्दीन नवाब ने राजनीतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और सांसारिक सभी विषयों पर अपनी कलम चलाई। सामाजिक समस्याओं पर उनका लेखन इतना गहरा और विश्लेषणात्मक है कि उन्हें "समाज का सर्जन" (जराह-ए-मुआशरा) भी कहा गया। कमज़ोर वर्गों पर होने वाला अन्याय, सामाजिक असमानता, वर्ग संघर्ष और मानवीय शोषण उनके उपन्यासों के मुख्य विषय रहे हैं।
निधन: मोहिउद्दीन नवाब का निधन शनिवार, 6 फरवरी 2016 को कराची में हुआ।
सहायक लिंक : | https://en.wikipedia.org/wiki/Mohiuddin_Nawab
join rekhta family!
-
गतिविधियाँ85
बाल-साहित्य1984
-
