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सलमा कँवल का परिचय
पहचान: उपन्यासकार, कहानीकार और नाटककार
सलमा कंवल पाकिस्तान की उन महिला रचनाकारों में शुमार होती हैं, जिन्होंने "जनप्रिय साहित्य" (अवामी अदब) या "डाइजेस्ट साहित्य" के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली और महिलाओं की समस्याओं पर आधारित कहानियों के ज़रिए पाठकों का एक विशाल वर्ग बनाया। उनकी सफलता का दौर साठ (60) के दशक में शुरू हुआ और उन्हें अपनी समकालीन उपन्यासकार रज़िया बट की प्रबल प्रतिद्वंद्वी माना जाता था।
सलमा कंवल ने अपने लंबे साहित्यिक करियर में 40 से अधिक उपन्यासों की रचना की। उनकी कहानियों का मुख्य केंद्र महिलाओं का व्यक्तित्व, उनकी मनोवैज्ञानिक व सामाजिक समस्याएं और घरेलू जीवन रहा। महिला पाठकों के बीच उनके उपन्यासों की मांग इतनी अधिक थी कि उन्हें 'सुपरहिट' उपन्यासकार माना जाता था।
सलमा कंवल का निजी जीवन दुखों और शारीरिक अक्षमता की कड़वाहटों से भरा था। विवाह के बाद उनकी इकलौती बेटी का कम उम्र में ही निधन हो गया, जो उनके लिए एक गहरा सदमा था। वह लंबे समय तक व्हीलचेयर तक सीमित रहीं, लेकिन उन्होंने इसी अकेलेपन और लाचारी को अपनी रचनात्मक ऊर्जा में बदल दिया।
सलमा कंवल की कहानियों में वे सभी तत्व मौजूद थे जो एक सफल फिल्म या नाटक के लिए आवश्यक होते हैं:
फिल्म 'मेहमान' (1978): उनके प्रसिद्ध उपन्यास "चुपके से बहार आ जाए" पर आधारित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही। इसमें बाबरा शरीफ और राहत काज़मी ने मुख्य भूमिकाएँ निभाईं।
फिल्म 'अंदलीब': उनके एक और लोकप्रिय उपन्यास पर आधारित एक सफल फिल्म।
नाटक 'पानी जैसा प्यार' (2011): इस प्रसिद्ध नाटक की मूल कहानी सलमा कंवल की ही थी। हालांकि क्रेडिट को लेकर विवाद हुआ, लेकिन इसकी सफलता उनके लेखन का ही परिणाम थी।
निधन: उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दशक लाहौर में बिताए और 2005 में वहीं उनका निधन हो गया।
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