सूरज नारायण मेहर के शेर
बज़्म-ए-दुनिया में नहीं नाम को जमइय्यत-ए-दिल
मुतमइन आए थे हम और परेशाँ निकले
आप हों जल्वा-नुमा रात को महताबी पर
हम भी तो देखें कि क्यों कर मह-ए-ताबाँ निकले
आप की बज़्म में हम आप से मिलने के लिए
ख़ुश ख़ुश आए थे मगर क्या ही पशेमाँ निकले
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टैग : रुस्वाई
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