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Syed Sabahuddin Abdur Rahman's Photo'

सय्यद सबाहुद्दीन अब्दुर्रहमान

1911 - 1987 | आज़मगढ़, भारत

प्रख्यात इतिहासकार और दबिस्तान-ए-शिब्ली के प्रतिनिधि विद्वान

प्रख्यात इतिहासकार और दबिस्तान-ए-शिब्ली के प्रतिनिधि विद्वान

सय्यद सबाहुद्दीन अब्दुर्रहमान का परिचय

मूल नाम : सबाहुद्दीन

जन्म :नालंदा, बिहार

निधन : 18 Nov 1987 | लखनऊ, उत्तर प्रदेश

LCCN :n82162146

पहचान: प्रख्यात शोधकर्ता, इतिहासकार, लेखक और दबिस्तान-ए-शिब्ली के प्रमुख विद्वान

सैयद सबाहुद्दीन अब्दुर रहमान उर्दू जगत के प्रमुख शोधकर्ता, इतिहासकार और लेखक थे, जिन्होंने विशेष रूप से इस्लामी इतिहास, सूफिया, मुस्लिम शासकों और भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक परंपरा पर महत्वपूर्ण कार्य किया। वे दास्तान-ए-शिब्ली के प्रमुख प्रतिनिधि विद्वानों में गिने जाते हैं और शोध व संपादन के क्षेत्र में उनकी सेवाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

सैयद सबाहुद्दीन अब्दुर रहमान का जन्म 1911 में बिहार के नालंदा ज़िले के निकट देसना कस्बे में हुआ। उनका संबंध एक विद्वतापूर्ण और धार्मिक परिवार से था। प्रारंभिक शिक्षा मदरसा इस्लाह, देसना में हुई जहाँ उन्हें सैयद सुलेमान नदवी जैसे महान विद्वानों की संगति मिली। इसके बाद उन्होंने मोहम्मडन एंग्लो-अरेबिक स्कूल, पटना में शिक्षा प्राप्त की। 1925 में नालंदा कॉलेज से मैट्रिक, फिर लंगट सिंह कॉलेज से बीए और पटना विश्वविद्यालय से एमए किया। इसके बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में मोहम्मद मुजीब के मार्गदर्शन में शोध कार्य से जुड़े।

1935 में उन्होंने शिब्ली कॉलेज, आज़मगढ़ में अध्यापन शुरू किया, लेकिन शीघ्र ही दारुल मुसन्निफ़ीन शिब्ली अकादमी से जुड़ गए। सैयद सुलेमान नदवी के आमंत्रण पर वे इस संस्थान में आए और आगे चलकर इसके निदेशक और सचिव बने। उन्होंने प्रसिद्ध पत्रिका "मआरिफ़" का संपादन भी किया और उसे एक प्रतिष्ठित शैक्षिक स्तर प्रदान किया।

उनकी विद्वतापूर्ण सेवाओं का क्षेत्र बहुत व्यापक था। उन्होंने भारतीय इतिहास, इस्लामी संस्कृति, सूफियों की जीवनियाँ, मुस्लिम शासकों और धार्मिक-सांस्कृतिक विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख कृतियों में: बज़्म-ए-तैमूरिया, बज़्म-ए-ममलूकिया, हिंदुस्तान के सलातीन, उलमा और मशाइख के संबंध, मुस्लिम शासकों की धार्मिक सहिष्णुता, अमीर खुसरो देहलवी: जीवन और काव्य, इस्लाम और मुस्तशरिकीन, सलीबी जंग आदि शामिल हैं। उनकी पुस्तक "बाबरी मस्जिद: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में" भी काफी चर्चित रही।

उनकी लेखनी में शोध की गहराई, ऐतिहासिक दृष्टि और संतुलित शैली स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने ईमानदारी के साथ विषयों का विश्लेषण किया और उर्दू में इतिहास लेखन के स्तर को ऊँचा उठाया। उनकी रचनाएँ आज भी शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

वे एक गंभीर, परिश्रमी और ज्ञान-समर्पित व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शोध और लेखन को समर्पित किया। दबिस्तान-ए-शिब्ली की परंपरा को आगे बढ़ाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निधन: 18 नवंबर 1987 को हुआ।

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