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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Anwar Shuoor's Photo'

अग्रणी पाकिस्तानी शायरों में से एक, एक अख़बार में रोज़ाना सामयिक विषयों पर 'क़िता' लिखते हैं।

अग्रणी पाकिस्तानी शायरों में से एक, एक अख़बार में रोज़ाना सामयिक विषयों पर 'क़िता' लिखते हैं।

अनवर शऊर

ग़ज़ल 156

अशआर 63

अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ

अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ

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मोहब्बत रही चार दिन ज़िंदगी में

रहा चार दिन का असर ज़िंदगी भर

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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था

वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह

ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह

बुरा बुरे के अलावा भला भी होता है

हर आदमी में कोई दूसरा भी होता है

हास्य 3

 

पुस्तकें 6

 

चित्र शायरी 11

वीडियो 38

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ऑडियो 8

उन से तन्हाई में बात होती रही

क्या बे-मुरव्वती का शिकवा गिला किसी से

ख़्वाह दिल से मुझे न चाहे वो

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