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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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असरार जामई

1937 - 2020 | दिल्ली, भारत

क्लासिकी परंपरा के प्रमुख हास्य-व्यंग शायर, अपनी विशिष्ट भाषा और अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

क्लासिकी परंपरा के प्रमुख हास्य-व्यंग शायर, अपनी विशिष्ट भाषा और अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

असरार जामई के शेर

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कल जो क़ातिल थे वही आए मसीहा बन कर

रहिए इन लोगों से हुश्यार चना जोर गरम

कुछ देर दुम हिलाइए आक़ा के सामने

फैला के पाँव घर पे फिर आराम कीजिए

ज़िंदगी हो मिरी नेताओं की सूरत या-रब

हो फ़क़त अपनी ग़रज़ से ही मोहब्बत या-रब

यारान-ए-हम-मज़ाक़ की महफ़िल सजाइए

जो मुत्तफ़िक़ हो उसे बदनाम कीजिए

अपनी ग़रज़ के आगे सदा-ए-ज़मीर क्या

सारे तकल्लुफ़ात को नीलाम कीजिए

दल-बदल जितने हैं कहते हैं ये सीना ताने

हम हैं 'ग़ालिब' के तरफ़-दार चना जोर गरम

जनता का ख़ून बेचिए पैसे कमाइए

क्यों शिकवा-हाए गर्दिश-ए-अय्याम कीजिए

ये फ़न पे तब्सिरा तो करते नहीं ज़रा भी

बस शख़्सियत का उन की ढोते फिरेंगे लाशा

रहूँ आज़ाद हो क़ैद-ए-मक़ामी मालिक

दिल बदलना हो मिरा शग़्ल-ए-दवामी मालिक

उर्दू का इक़बाल भी देखा

और उस को पामाल भी देखा

लीडर जो नज़र आए तो बोलो ये अदब से

तक़रीर में तुम गर्मी-ए-व्हिस्की से जिला दो

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