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निदा फ़ाज़ली

1938 - 2016 | मुंबई, भारत

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिद्ध

महत्वपूर्ण आधुनिक शायर और फ़िल्म गीतकार। अपनी ग़ज़ल ' कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ' के लिए प्रसिद्ध

निदा फ़ाज़ली

ग़ज़ल 94

नज़्म 48

अशआर 84

होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है

इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिस को भी देखना हो कई बार देखना

कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन

फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कहीं ज़मीन कहीं आसमाँ नहीं मिलता

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो

चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे

दोहा 12

बच्चा बोला देख कर मस्जिद आली-शान

अल्लाह तेरे एक को इतना बड़ा मकान

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मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार

दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार

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घर को खोजें रात दिन घर से निकले पाँव

वो रस्ता ही खो गया जिस रस्ते था गाँव

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सब की पूजा एक सी अलग अलग हर रीत

मस्जिद जाए मौलवी कोयल गाए गीत

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सीधा-साधा डाकिया जादू करे महान

एक ही थैले में भरे आँसू और मुस्कान

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फ़िल्मी गीत 18

पुस्तकें 24

चित्र शायरी 26

वीडियो 46

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ऑडियो 35

आज ज़रा फ़ुर्सत पाई थी आज उसे फिर याद किया

आनी जानी हर मोहब्बत है चलो यूँ ही सही

उस को खो देने का एहसास तो कम बाक़ी है

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