रंजूर अज़ीमाबादी
ग़ज़ल 5
अशआर 9
दिखा कर ज़हर की शीशी कहा 'रंजूर' से उस ने
अजब क्या तेरी बीमारी की ये हकमी दवा निकले
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हास्य 3
ऑडियो 4
जनाज़ा धूम से उस आशिक़-ए-जाँ-बाज़ का निकले
देता है मुझ को चर्ख़-ए-कुहन बार बार दाग़
मैं और हम-आग़ोश हूँ उस रश्क-ए-परी से
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