सैफ़ इरफ़ान के शेर
तेरे हाथों ने जो थामा है किसी और का हाथ
मेरी आँखों को यही एक नज़ारा दुख है
अब लोग लिख रहे हैं मोहब्बत की दास्तान
मलबे से मेरे उस की निशानी निकाल कर
ये देखने के लिए उस ने फिर से तोड़ दिया
कि कैसे टूटा हुआ दिल दोबारा बनता है
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जहाँ से 'सैफ़' हमें कुछ नज़र नहीं आता
वहीं से रास्ता अक्सर हमारा बनता है
बनता रहा बिगड़ता रहा उम्र-भर ये दिल
लेकिन तमाम उम्र ये पत्थर न बन सका
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टैग : दिल
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वो बद-नसीब लोग बड़े बद-नसीब लोग
प्यासे रहे ज़मीन से पानी निकाल कर
ऐसी हालत में तो मर जाते हैं अच्छे अच्छे
हम ने जिस हाल में इस बार गुज़ारा दुख है
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टैग : ग़म
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ये सोच कर के कभी झूट बोल लेते हैं
हर एक शख़्स से अब राब्ता ख़राब न हो
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टैग : झूठ
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