शाहरुख़ अबीर का परिचय
आज दर-पेश है फिर से मुझे कर्बल का सफ़र
आज कुछ मेरे तरफ़-दार भी कम आए हैं
शाहरुख़ अबीर 8 जनवरी 1993 को दिल्ली में पैदा हुए। इब्तिदाई तालीम नुमानिया मुईनुल-उल- इस्लाम प्राइमरी स्कूल और बाद अज़ाँ एंग्लो अरेबिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल (तारीख़ी मदरसा ग़ाज़ीउद्दीन, क़दीम दिल्ली कॉलेज) से हासिल की। आला तालीम के लिए उन्होंने ज़ाकिर हुसैन कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.ए. (उर्दू ऑनर्स) किया, और फिर उर्दू विभाग, फैकल्टी ऑफ़ आर्ट्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री ली। उर्दू मास मीडिया में पी.जी. डिप्लोमा किया। बादअज़ाँ "तज़किरा: इक्कीसवीं सदी के शुअरा-ए-दिल्ली" के उन्वान से मक़ाला लिखकर एम.फ़िल. की डिग्री हासिल की। आठ बरस तक आकाशवाणी की उर्दू सर्विस में बतौर कैज़ुअल अनाउंसर ख़िदमात अंजाम दीं। विभिन्न प्रकाशनों के लिए फ़्री लांसर के तौर पर क्लासिकी उर्दू शाइरों के इन्तिख़ाब पर काम किया । फ़िल-वक़्त रेख़्ता फ़ाउंडेशन के पब्लिकेशन विभाग से वाबस्ता हैं।
शाहरुख़ अबीर का शुमार अह्द-ए-हाज़िर के उभरते हुए नौजवान शुअरा में होता है। उनकी शाइरी में दाख़िली कर्ब, वुजूदी सवालात और मोहब्बत की लतीफ़ कैफ़ियात एक साथ जलवागर होती हैं। उनके यहाँ जज़्बे की शिद्दत और बयान की सादगी मिलकर एक ऐसा दिलआवेज़ शेरी आहंग पैदा करती है जो क़ारी के ज़ेहन पर देर तक असरअंदाज़ रहता है।
उनकी शाइरी महज़ जज़्बात का इज़हार नहीं बल्कि एक फ़िक्री और बातिनी सफ़र है, जहाँ इंसान अपने वुजूद से हम-कलाम दिखाई देता है। अबीर के यहाँ इश्क़ रिवायती हुदूद से निकलकर एक वसीअ इंसानी तजरबा बन जाता है, जबकि ज़िन्दगी की नापायदारी और ज़ात की पेचीदगियाँ भी नुमायाँ मौज़ूआत के तौर पर सामने आती हैं। शाहरुख़ अबीर की शाइरी में एक तरफ़ रिवायत की बाज़गश्त सुनाई देती है तो दूसरी तरफ़ जदीद हिस्सियत की ताज़गी भी मौजूद है, जो उन्हें अपने हम-असरों में मुनफ़रिद मक़ाम अता करती है।