शाहरुख़ अबीर के शेर
आज दर-पेश है फिर से मुझे कर्बल का सफ़र
आज कुछ मेरे तरफ़-दार भी कम आए हैं
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टैग : कर्बला
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अपनी तस्वीर ऐसे मत देखो
आँख को आइना नहीं करते
तुम को मालूम क्या है आज़ादी
तुम परिंदे रिहा नहीं करते
चलता है साथ साथ ख़मोशी का इक हुजूम
थक कर गिरेंगे हम तो सदाएँ लगाएँगे
शौक़-ए-दीदार में चले आए
चाँदनी रात और हम दोनों
एक मंज़र में सिमटे हम दोनों
तान कर इंतिसाब की चादर
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टैग : इंतिसाब
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मैं कि बीमार दिल नहीं लेकिन
रोज़ इक चारागर से मिलता हूँ
आ गए हैं 'अबीर' कूचे में
पहली बरसात और हम दोनों
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टैग : बारिश
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बस सुनाते हो फ़ैसला अपना
तुम कभी मशवरा नहीं करते