दाद भी फ़ित्ना-ए-बेदाद भी क़ातिल की तरफ़

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

दाद भी फ़ित्ना-ए-बेदाद भी क़ातिल की तरफ़

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

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    दाद भी फ़ित्ना-ए-बेदाद भी क़ातिल की तरफ़

    बे-गुनाही के सिवा कौन था बिस्मिल की तरफ़

    मंज़िलें राह में थीं नक़्श-ए-क़दम की सूरत

    हम ने मुड़ कर भी देखा किसी मंज़िल की तरफ़

    मक़्तल-ए-नाज़ से गुज़रे तो गुज़रने वाले

    फूल कुछ फेंक गए दामन-ए-क़ातिल की तरफ़

    झिलमिलाते नहीं बे-वजह तो महफ़िल के चराग़

    इक नज़र देख तो लो साहब-ए-महफ़िल की तरफ़

    कितनी बे-कैफ़ हैं साहिल की फ़ज़ाएँ या रब

    कोई तूफ़ान का रुख़ मोड़ दे साहिल की तरफ़

    याद आता है वो अंदाज़-ए-तजाहुल दोस्त

    बात औरों से मगर रू-ए-सुख़न दिल की तरफ़

    ज़िक्र आया था हयात-ए-अबदी का 'ताबाँ'

    लोग क्यूँ तकने लगे कूचा-ए-क़ातिल की तरफ़

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    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    दाद भी फ़ित्ना-ए-बेदाद भी क़ातिल की तरफ़ नोमान शौक़

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