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पहचान: प्रसिद्ध शोधकर्ता, इतिहासकार, साहित्यकार और शिब्ली के शिष्य
मौलाना अब्दुस्सलाम नदवी उर्दू जगत के उन बड़े विद्वानों और लेखकों में गिने जाते हैं जिन्होंने इतिहास, सीरत, साहित्य और अनुवाद के क्षेत्र में कीमती काम किया। वे दारुल उलूम नदवतुल उलेमा के शुरुआती छात्रों में थे, अल्लामा शिब्ली नोमानी के प्रिय शिष्य थे और दारुल मुसन्निफ़ीन शिब्ली अकादमी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। उनकी ज़िंदगी एकाग्रता, सच्चाई और सादगी की मिसाल थी।
उनका जन्म 16 फ़रवरी 1883 को आज़मगढ़ के गाँव अलाउद्दीन पट्टी में हुआ। उनके पिता शेख दीन मोहम्मद फ़ारसी, हिंदी और पुराने हिसाब के जानकार थे और दीन का भी अच्छा ज्ञान रखते थे। शुरुआती पढ़ाई गाँव के मकतब में की, फिर अरबी पढ़ने के लिए कानपुर, आगरा और ग़ाज़ीपुर गए। 1906 में 23 साल की उम्र में नदवा में दाख़िला लिया। 1910 में पढ़ाई पूरी कर वहीं अरबी अदब के शिक्षक बने।
छात्र जीवन से ही लिखने का शौक था। 1906 में उन्होंने “तनासुख़” पर एक लेख लिखा जिसे अल्लामा शिब्ली ने बहुत पसंद किया और बिना बदलाव के पत्रिका “अन्नदवा” में छापा और इनाम भी दिया। बाद में वे उसी पत्रिका के संपादन से भी जुड़े। शिब्ली नोमानी ने “सीरतुन्नबी” लिखते समय उन्हें सहायक बनाया।
1912 में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के साथ कलकत्ता जाकर अख़बार “अल-हिलाल” से जुड़े। 1914 में अल-हिलाल बंद हुआ और उसी साल शिब्ली नोमानी का इंतकाल हो गया। इसके बाद वे दारुल मुसन्निफ़ीन शिब्ली अकादमी से जुड़े रहे और पूरी ज़िंदगी वहीं इल्मी और लेखन का काम करते रहे। सैयद सुलेमान नदवी के साथ मिलकर संस्था को आगे बढ़ाया।
वे बहुत सादा जीवन जीने वाले, शांत स्वभाव और शोहरत से दूर रहने वाले इंसान थे। पूरी ज़िंदगी लिखने और शोध में लगे रहे। उन्हें पद, पैसा या राजनीति से कोई दिलचस्पी नहीं थी।
उनकी किताबें इतिहास, साहित्य और अनुवाद पर हैं। उनकी मशहूर किताबों में — उस्वा-ए-सहाबा, उस्वा-ए-सहाबियात, सीरत उमर बिन अब्दुल अज़ीज़, हुक़मा-ए-इस्लाम, शेरुल-हिंद, इक़बाल कामिल, तारीख़-ए-फ़िक़्ह-ए-इस्लामी (अनुवाद), इब्न खलदून (अनुवाद) आदि शामिल हैं।
उस्वा-ए-सहाबा उर्दू में अपने विषय की शुरुआती भरोसेमंद किताबों में मानी जाती है। इक़बाल कामिल की वजह से उन्हें शुरुआती इक़बाल विशेषज्ञों में गिना जाता है।
उनकी भाषा सरल, गहरी और असरदार थी। उन्होंने अपने उस्ताद शिब्ली नोमानी के इल्मी कामों को आगे बढ़ाया।
निधन: 4 अक्तूबर 1955 को उनका इंतकाल हुआ।