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पहचान:लेबनानी मूल के अमेरिकी कवि, दार्शनिक, चित्रकार और विश्व साहित्य व अध्यात्म के महान चिंतक
विश्व साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा के इतिहास में जिब्रान ख़लील जिब्रान एक ऐसी बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में सामने आते हैं, जिनकी रचनाओं ने न केवल साहित्य बल्कि मानवीय विचार और संवेदना पर भी गहरा प्रभाव डाला। वे एक कवि, दार्शनिक और चित्रकार होने के साथ-साथ ऐसे चिंतक थे जिनके विचारों ने पूर्व और पश्चिम के बीच एक वैचारिक सेतु स्थापित किया।
जिब्रान ख़लील जिब्रान का जन्म 6 जनवरी 1883 को लेबनान के पहाड़ी क्षेत्र बश्शरी (Mount Lebanon) में हुआ। वे मात्र 12 वर्ष की आयु में अपने परिवार के साथ अमेरिका प्रवास कर गए, जहाँ उन्होंने एक नए सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण में जीवन की शुरुआत की। प्रवासी जीवन की कठिनाइयों के बावजूद उनकी रचनात्मक प्रतिभा शीघ्र ही उभर कर सामने आई, और बोस्टन के साहित्यिक एवं कलात्मक वातावरण में उन्हें संरक्षण और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
जिब्रान ख़लील जिब्रान की सबसे प्रसिद्ध कृति "The Prophet" है, जो 1923 में प्रकाशित हुई। यह पुस्तक जीवन, प्रेम, स्वतंत्रता और अध्यात्म जैसे विषयों पर आधारित काव्यात्मक निबंधों का संग्रह है, जिसने विश्वभर में अपार लोकप्रियता प्राप्त की और आज भी एक साहित्यिक क्लासिक मानी जाती है।
उनकी रचनाएँ केवल "The Prophet" तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने अनेक कविताएँ, निबंध और चिंतनपरक लेख भी लिखे। उनके साहित्य में प्रेम, स्वतंत्रता, मानवीय अस्तित्व, आध्यात्मिकता और ब्रह्मांडीय समरसता जैसे विषय प्रमुख हैं। उनकी विचारधारा में पूर्वी सूफ़ी परंपरा और पश्चिमी दर्शन का सुंदर समन्वय मिलता है, जो उनकी रचनाओं को वैश्विक आकर्षण प्रदान करता है।
जिब्रान ख़लील जिब्रान केवल लेखक ही नहीं बल्कि एक उत्कृष्ट चित्रकार भी थे। उन्होंने अनेक चित्र और रेखांकन बनाए, जिनमें उनके आंतरिक भाव और चिंतन की गहराई झलकती है। उनका चित्रकला-शिल्प भी उनकी लेखनी की तरह विशिष्ट और प्रभावशाली है।
निधन: जिब्रान ख़लील जिब्रान का निधन 10 अप्रैल 1931 को यकृत रोग (cirrhosis) के कारण 48 वर्ष की आयु में न्यूयॉर्क, अमेरिका में हुआ।