aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
मशहूर शायर मुहम्मद मुस्तफ़ा खान शिफ़्तह की उर्दू ग़ज़लों का एक जामे' मजमूआ। इस जिल्द में कुलुब अली खान फ़ाइक का एक मुक़द्दमा शामिल है और शेख मदद अली की निगरानी में दीवान-ए-शिफ़्तह की बुनियाद पर मुरत्तब किया गया है।
शेफ़्ता, नवाब मुस्तफ़ा ख़ाँ(1809-1869)रियासत जहाँगीराबाद, बुलंदशहर के नवाब थे। पहले ‘मोमिन’ और फिर ‘ग़ालिब’ के शागिर्द रहे। 1857 की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए क़ैद किए गए जिसके बा’द एकांतवास अख़्तियार कर लिया। मिर्ज़ा ग़लिब से गहरे संबंस थे और मुसीबत की घड़ी में उनकी बहुत मदद की।