बदन का रम्ज़ समझ रूह का इशारा समझ

फ़ज़्ल गीलानी

बदन का रम्ज़ समझ रूह का इशारा समझ

फ़ज़्ल गीलानी

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    बदन का रम्ज़ समझ रूह का इशारा समझ

    मुझे समझ समझ दुख मिरा ख़ुदारा समझ

    तुझे हम और किसी का होने देंगे कभी

    तू भा गया है हमें ख़ुद को अब हमारा समझ

    जो तीरगी में तुझे कुछ दिखाई देता नहीं

    समझ में आए तो इस को भी इक नज़ारा समझ

    नहीं तो वक़्त ही समझाएगा तुझे इक दिन

    मैं चाहता हूँ मिरी बात को दोबारा समझ

    कि मैं तो अपने भी कुछ काम नहीं पाया

    तुझे ये किस ने कहा था मुझे सहारा समझ

    ये कार-गाह-ए-तिलिस्मात है यहाँ 'सय्यद'

    ख़सारा नफ़अ' समझ नफ़अ' को ख़सारा समझ

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