जाँ-फ़िशानी का वाँ हिसाब अबस

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

जाँ-फ़िशानी का वाँ हिसाब अबस

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

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    जाँ-फ़िशानी का वाँ हिसाब अबस

    जो कहो उस का है जवाब अबस

    माहताब और कताँ का आलम है

    आरिज़-ए-दोस्त पर नक़ाब अबस

    क़ुफ़्ल-ए-दर की कलीद ना-पैदा

    अब तमन्ना-ए-फत्ह-ए-बाब अबस

    ज़ुल्फ़-ए-पुर-ख़म हवा से क्यूँ हिले

    आप खाते हैं पेच-ओ-ताब अबस

    ख़त उसे भेजना ज़रूर मगर

    दोस्त से ख़्वाहिश-ए-जवाब अबस

    मेरे अशआ'र सब बयाज़ी हैं

    हम-नशीं फ़िक्र-ए-इंतिख़ाब अबस

    है हमारी नज़र में हुरमत-ए-मय

    पेचिश-ए-अहल-ए-एहतिसाब अबस

    याँ नहीं कुफ्र-ओ-दीन ख़ौफ़-ओ-रजा

    लुत्फ़ बे-फ़ाएदा इताब अबस

    सवाब उस में है इस में असर

    सब्र बे-हूदा इज़्तिराब अबस

    वा'दा उस ने किया तो क्या 'नाज़िम'

    अबस ख़ानुमाँ-ख़राब अबस

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