क्या मसर्रत है पूछिए हम से

आसी रामनगरी

क्या मसर्रत है पूछिए हम से

आसी रामनगरी

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    क्या मसर्रत है पूछिए हम से

    है इबारत हर इक ख़ुशी ग़म से

    अरक़-आलूद आप का चेहरा

    हो धुला फूल जैसे शबनम से

    ज़ब्त-ए-गिर्या से राज़-ए-ग़म था छुपा

    खुल गया आज चश्म-ए-पुर-नम से

    दर्द-ए-दिल का नहीं कोई दरमाँ

    ज़ख़्म क्या मुंदमिल हो मरहम से

    दर-हक़ीक़त क़रीब रहते हैं

    वो ब-ज़ाहिर ही दूर हैं हम से

    जब अज़ल से ख़ता ज़मीर में है

    क्यूँ ख़ता हो इब्न-ए-आदम से

    स्रोत :
    • पुस्तक : Harf Harf Khowab (पृष्ठ 59)
    • रचनाकार : asi ramnagari
    • प्रकाशन : Nasim Pathara Po. Moghalsarai (Varansi) (1992)
    • संस्करण : 1992

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