राह-ए-तलब में कौन किसी का अपने भी बेगाने हैं

इब्न-ए-सफ़ी

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इब्न-ए-सफ़ी

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    राह-ए-तलब में कौन किसी का अपने भी बेगाने हैं

    चाँद से मुखड़े रश्क-ए-ग़ज़ालाँ सब जाने पहचाने हैं

    तन्हाई सी तन्हाई है कैसे कहें कैसे समझाएँ

    चश्म लब-ओ-रुख़्सार की तह में रूहों के वीराने हैं

    उफ़ ये तलाश-ए-हुस्न-ओ-हक़ीक़त किस जा ठहरें जाएँ कहाँ

    सेहन-ए-चमन में फूल खिले हैं सहरा में दीवाने हैं

    हम को सहारे क्या रास आएँ अपना सहारा हैं हम आप

    ख़ुद ही सहरा ख़ुद ही दिवाने शम-ए-नफ़स परवाने हैं

    बिल-आख़िर थक हार के यारो हम ने भी तस्लीम किया

    अपनी ज़ात से इश्क़ है सच्चा बाक़ी सब अफ़्साने हैं

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    इब्न-ए-सफ़ी

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    हबीब वली मोहम्मद

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    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

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    राह-ए-तलब में कौन किसी का अपने भी बेगाने हैं नोमान शौक़

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