रास आती है बहुत आब-ओ-हवा सहरा की

मिर्ज़ा अतहर ज़िया

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मिर्ज़ा अतहर ज़िया

MORE BYमिर्ज़ा अतहर ज़िया

    रास आती है बहुत आब-ओ-हवा सहरा की

    जाने दे दी है तुझे किस ने दुआ सहरा की

    तुझ को मिलने से रहा शहर में वहशत का इलाज

    तुझ को शायद कि शिफ़ा बख़्शे हवा सहरा की

    हम तो लेते हैं मज़ा घर में ही वीरानी का

    नाज़-बरदारी करे कौन भला सहरा की

    इक समुंदर है मिरी ज़ात के पैमाने में

    डाल रक्खी है मगर उस पे रिदा सहरा की

    तेरा हम-ज़ाद तुझे शहर में मिलने से रहा

    बाँध ले रख़्त-ए-सफ़र ख़ाक उड़ा सहरा की

    स्रोत :
    • पुस्तक : Abjad-e-ishq (पृष्ठ 96)
    • रचनाकार : Mirza Athar Zia
    • प्रकाशन : Green Pages (2017)
    • संस्करण : 2017

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